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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Mon, 18 May 2026 18:11:14 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[शानदार सरकारी खरीद से गेहूं के स्टॉक में भारी बढ़ोत्तरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल के लिए इस बार गेहूं की खरीद में शानदार बढ़ोत्तरी देखी जा रही है जिससे इसका स्टॉक बढ़कर न्यूनतम आवश्यक बफर मात्रा से काफी ऊपर पहुंच गया है। वैसे इस बार हल्की क्वालिटी के बदरंग एवं चमकहीन तथा टूटे-चिपटे दाने वाले गेहूं की खरीद अधिक हुई है। पिछले साल सम्पूर्ण रबी मार्केटिंग सीजन (अप्रैल-जून- 2025) के दौरान करीब 302 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी जबकि चालू वर्ष में 13 मई 2026 तक कुल खरीद बढ़कर 306 लाख टन से ऊपर पहुंच गई। कुछ महत्वपूर्ण राज्यों में खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है।</span></p><p>पिछले साल की तुलना में इस वर्ष केन्द्रीय पूल के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं बिहार में गेहूं की सरकारी खरीद में अच्छी वृद्धि हुई है और मध्य प्रदेश में भी खरीद की मात्रा गत वर्ष के काफी करीब पहुंच गई है। इस बार सरकार ने कुल 345 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य नियत किया है जिसका 89 प्रतिशत भाग हासिल हो चुका है। पिछले साल 13 मई तक 292.60 लाख टन गेहूं खरीदा गया था जबकि इस बार उससे 13.52 लाख टन अधिक की खरीद हुई है।&nbsp;</p><p>इस बार मुख्यतः दो कारणों से गेहूं की सरकारी खरीद में इजाफा हुआ है। एक तो पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में मौसमी कारणों से गेहूं की क्वालिटी खराब हो गई और किसानों ने स्टॉक रोकने के बजाए सरकारी क्रय केन्द्रों पर उसे बेचना ज्यादा लाभदायक समझा / वहां किसानों को 2585 रुपए प्रति क्विंटल का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त हो रहा था। </p><p>दूसरी बात यह है कि इस बार मिलर्स / प्रोसेसर्स एवं व्यापारी / स्टॉकिस्ट किसानों से गेहूं की जोरदार खरीद नहीं कर रहे हैं क्योंकि उन्हें आगे सरकारी सख्ती की आशंका सता रही है। पिछले साल उसने ऊंचे दाम पर गेहूं खरीदा मगर सरकार ने स्टॉक लिमिट लागू करके उसे नीचे भाव पर अपने स्टॉक को बेचने पर विवश कर दिया। गेहूं के निर्यातक भी फिलहाल ज्यादा सक्रिय नहीं हैं। आगे उनकी सक्रियता बढ़ सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32723</guid>				
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 13:50:58 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[भीषण गर्मी का प्रकोप]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले कुछ दिनों तक देश के लगभग सभी भागों में भीषण गर्मी का प्रकोप बरकरार रहने का अनुमान लगाया है जिससे खरीफ फसलों की बिजाई प्रक्रिया आरंभ होने से पूर्व किसानों को अपने खेतों&nbsp; &nbsp;को तैयार करने में भारी कठिनाई हो सकती है। इसके तहत खासकर राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश जैसे प्रांतों में स्थिति बेहद खराब होने की आशंका है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">जनवरी से ही देश के अधिकांश इलाकों में अच्छी वर्षा नहीं होने से बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक चिंताजनक स्तर तक नीचे आ गया है। अब मानसून के आने तक भयंकर गर्मी का प्रकोप जारी रहने से समस्या और भी गंभीर हो सकती है। कम से कम 21 मई तक भीषण गर्मी एवं ऊंचे तापमान से राहत मिलना मुश्किल है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">वैसे मौसम विभाग ने इस अवधि के दौरान देश के दक्षिणी राज्यों एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बौछार पड़ने अथवा भारी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की है। लेकिन देश के पश्चिमोत्तर भाग, मध्यवर्ती क्षेत्र और पूर्वी इलाका भयंकर गर्मी तथा सूखे का संकट झेलने के लिए विवश होगा। 16 से 21 मई के बीच तापमान काफी ऊंचे स्तर पर मौजूद रहेगा।&nbsp;</span></p><p>मौसम विभाग ने 26 मई को केरलम में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दस्तक देने की संभावना व्यक्त की है जो राहत वाली खबर है। पिछले साल भी मानसून नियत समय से कुछ पहले आया था जिससे कई राज्यों में खरीफ फसलों की अगैती खेती शुरू करने में किसानों को सहायता मिली थी।</p><p> इस बार आगामी महीनों में अल नीनो मौसम चक्र के सक्रिय रहने की संभावना है जिससे मानसून कुछ कमजोर पड़ सकता है। दरअसल मई में मानसून-पूर्व की अच्छी वर्षा से किसानों को काफी राहत मिलती है लेकिन इस बार अनेक इलाके अभी तक सूखे हैं। वहां यथाशीघ्र भारी बारिश की सख्त आवश्यकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32721</guid>				
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 13:04:31 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पंजाब में मात्र 40 हजार हेक्टेयर में कपास की खेती]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-40-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">भटिंडा। पंजाब में कपास की अगैती खेती होती ही जिसका आदर्श समय 20 अप्रैल से 15 मई तक माना जाता है। पिछले दिन आदर्श समय समाप्त होने के बाद जो आंकड़ा सामने आया है वह बेहद निराशाजनक है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार पंजाब में इस वर्ष कपास का कुल उत्पादन क्षेत्र महज 40,402 हेक्टेयर पर पहुंच सका जो नियत लक्ष्य&nbsp; 1.25 लाख हेक्टेयर का मात्र 32 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि राज्य में कपास की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बहुत घट गया है।&nbsp;</span></p><p>वैसे पंजाब में आदर्श समय के बाद भी कपास की बिजाई होती है जो कमोबेश मई के अंत और कभी-कभी जून के प्रथम सप्ताह तक जारी रहती है लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि 20 मई के बाद होने वाली बिजाई की फसल को आगे प्रतिकूल मौसम एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप का गंभीर खतरा रहता है और उसकी उपज दर काफी घट जाती है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रतीत होता है कि लेट बिजाई के बावजूद पंजाब में कपास का कुल रकबा निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे रह जाएगा।</p><p>कृषि विभाग के अनुसार इस बार गेहूं फसल की कटाई-तैयारी देर से शुरू होने के कारण कपास की बिजाई में विलम्ब हो गया मगर विभाग को अब भी उम्मीद है कि मई के अंत तक इसका कुल क्षेत्रफल नियत लक्ष्य के आसपास पहुंच सकता है। इस वर्ष देसी या परम्परागत किस्मों की कपास का बिजाई क्षेत्र भी 10 हजार हेक्टेयर के करीब पहुंचने की संभावना है। </p><p>पंजाब में 2024-25 के सीजन में फसल का कुल उत्पादन क्षेत्र पहली बार एक लाख हेक्टेयर से घटकर 99,700 हेक्टेयर पर आया था मगर 2025-26 के सीजन में सुधरकर 1.19 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। इस बार स्थिति ज्यादा खराब लगती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32719</guid>				
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 12:34:58 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अप्रैल में सोयामील का निर्यात घटकर 50 हजार टन रह जाने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-50-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">इंदौर। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण संगठन ने-सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के (सोपा) के अनुसार अप्रैल में देश से सोयामील का निर्यात घटकर 50 हजार टन पर अटक गया जो अप्रैल 2025 के शिपमेंट 2.14 लाख टन से बहुत कम है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान सोयामील का घरेलू उत्पादन भी 7.50 लाख टन से गिरकर 6.31 लाख टन रह गया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">सोया की नई मासिक रिपोर्ट के मुताबिक चालू मार्केटिंग सीजन के आरंभिक सात महीनों में यानी अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के दौरान सोयामील का कुल घरेलू उत्पादन 51.30 लाख टन पर ही पहुंच सका जो 2024-25 सीजन की समान अवधि के उत्पादन 55.20 लाख टन से करीब 4 लाख टन कम था। सोयामील का निर्यात ऑफर मूल्य ऊंचा चल रहा है।&nbsp;</span></p><p>सोया की रिपोर्ट के मुताबिक देश भर की मंडियों में अप्रैल 2025 के दौरान 5.50 लाख टन सोयाबीन की आवक हुई थी मगर अप्रैल 2026 में यह एक लाख टन घटकर 4.50 लाख टन रह गई। इसी तरह अक्टूबर 2025- अप्रैल 2026 में सोयाबीन की कुल आपूर्ति 67.50 लाख टन पर पहुंच सकी जो 2024-25 सीजन के इन्हीं महीनों की कुल आवक 77.50 लाख टन से 10 लाख टन कम थी। इन सात महीनों में देश से सोयामील का कुल निर्यात भी 13.30 लाख टन से घटकर 8.22 लाख टन रह गया।</p><p>रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में देश के अंदर करीब 8 लाख टन सोयाबीन की क्रशिंग हुई जबकि अप्रैल- 2025 में 9.50 लाख टन की क्रशिंग हुई थी। अप्रैल के अंत में देश में करीब 43.80 लाख टन सोयाबीन का स्टॉक मौजूद था जबकि नए माल की आवक अक्टूबर 2026 से आरंभ होगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32717</guid>				
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 11:50:46 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई को केरलम पहुंचने की संभावना]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/---26-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अपने नए अपडेट में कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष 26 मई को भारत की मुख्य भूमि में प्रवेश कर सकता है जो 1 जून की नियत तिथि से 6 दिन पूर्व होगा। भारत में आमतौर पर मानसून सबसे पहले केरलम के सुदूर दक्षिणी भाग- कालीकट तट पर पहुंचता है और फिर वहां से आगे बढ़ते हुए क्रमिक रूप से देश के अन्य भागों को कवर करता है।&nbsp;</span></p><p>बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर के ऊपर मानसून के निर्माण के लिए परिस्थितियां पहले ही अनुकूल हो चुकी हैं। अंडमान- निकोबार द्वीप में मानसून का आगमन सामान्यतः 16-17 मई तक हो जाता है। वहां लगभग 10 दिनों तक सक्रिय रहने के बाद मानसून केरलम की ओर बढ़ता है और फिर देश के विभिन्न भागों में पहुंचता है।&nbsp;</p><p>मौसम विभाग के इस अपडेट से कम से कम इतना आश्वासन अवश्य मिल रहा है कि अल नीनो मौसम चक्र मानसून के आगमन में बाधक नहीं बनेगा। नियत समय से 6 दिन पूर्व ही मानसून के आने से देश के अन्य भागों में भी इसकी सक्रियता जल्दी बढ़ सकती है जिससे किसानों को खरीफ फसलों की खेती में अच्छी सहायता मिलेगी। </p><p>अभी ऊंचे तापमान एवं वर्षा के अभाव से खेतों की मिटटी में नमी की भारी कमी हो गई है। जून में यदि अच्छी वर्षा हुई तो बांधों-जलाशयों में भी पानी का स्तर ऊंचा उठ सकता है जो पिछले कई महीनों से लगातार घट रहा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32715</guid>				
                <pubDate>Sat, 16 May 2026 10:39:04 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[प्रतिकूल मौसम से कनाडा में मटर की बिजाई की गति धीमी]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">सस्काटून। कनाडा के सबसे प्रमुख कृषि उत्पादक प्रान्त- सस्कैचवान में मौसम की हालत इस तरह अनुकूल नहीं होने से खासकर उत्तरी एवं पूर्वी भाग में मटर की बिजाई में देरी हो रही है। अगर ज्यादा दिनों तक बिजाई संभव नहीं हो सकी तो किसान मटर के बजाए अन्य फसलों की बिजाई आरंभ कर सकते हैं जिससे इसके क्षेत्रफल में कमी आ सकती है।&nbsp;</span></p><p>वर्तमान समय में कनाडा में पीली मटर का भाव कुछ मजबूत बना हुआ है क्योंकि चीन और भारत के आयातक इसकी खरीद में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। पीली मटर का भाव उत्पादक मंडियों में 8 डॉलर प्रति बुशेल के आसपास मजबूती से स्थिर बना हुआ है और निकट भविष्य में इसमें ज्यादा गिरावट आने की संभावना नहीं है।</p><p> वैसे कनाडा में किसानों के पास अब भी मटर का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद है जिसे घटाने के लिए अच्छी मात्रा में उसकी बिक्री का प्रयास किया जा रहा है। मटर की बिजाई पहले ही आरंभ हो चुकी है। इसकी अगली नई फसल का अनुबंध मूल्य भी 8 डॉलर प्रति बुशेल के करीब ही है।&nbsp;</p><p>जहां तक हरी मटर का सवाल है तो इसका दाम 9.50 डॉलर प्रति बुशेल बताया जा रहा है जबकि इसकी अगली नई फसल का अग्रिम अनुबंध मूल्य 9.00-9.50 डॉलर प्रति बुशेल के बीच चल रहा है। मापले मटर का भाव 10.50-12.00 डॉलर प्रति बुशेल के बीच स्थिर बना हुआ है। कारोबार में ज्यादा सक्रियता नहीं है। चालू माह के अंत तक कनाडा में मटर के बिजाई क्षेत्र की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। अमरीका में भी मटर की बिजाई अभी जारी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32705</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:25:13 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[कालीमिर्च की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव की उम्मीद]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">कोच्चि। हालांकि मसाला उत्पाद के निर्माताओं एवं दिसावरी व्यापारियों द्वारा कालीमिर्च की मानसून- पूर्व लिवाली में अच्छी दिलचस्पी दिखाई जा रही है मगर पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण निर्यातकों की गतिविधियां सुस्त बनी हुई हैं। केरल में कालीमिर्च फसल की तुड़ाई-तैयारी समाप्त हो चुकी है मगर कर्नाटक में यह अभी जारी है।</span></p><p>कोच्चि के टर्मिनल मार्केट में कालीमिर्च की सीमित आवक हो रही है और अच्छी खरीद-बिक्री के कारण इसका दाम मजबूत बना हुआ है। वहां गार्बल्ड श्रेणी का भाव 725 रुपए प्रति किलो तथा अनगार्बल्ड किस्म का 715 रुपए प्रति किलो चल रहा था। </p><p>दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। दरअसल मानसून सीजन के दौरान कालीमिर्च में नमी का अंश बढ़ जाता है जिस पर उत्पादक तो ज्यादा ध्यान नहीं देते मगर मसाला तेल एवं ओलियोरेसिन बनाने वाली फर्मों को कठिनाई होती है क्योंकि इससे उत्पाद की क्वालिटी कमजोर हो जाती है। इसे देखते हुए कंपनियां पहले ही सूखे माल की खरीद करके उसका सुरक्षित भंडारण करना पसंद करती हैं। </p><p>दिसावरी व्यापारियों / स्टॉकिस्टों&nbsp; को भी मानसून सीजन के दौरान माल मंगाने में कठिनाई होती है। विदेशों से फिलहाल कालीमिर्च का नगण्य आयात हो रहा है इसलिए कीमतों पर ज्यादा दबाव नहीं है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32703</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 20:22:21 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[हल्दी कीमतों में गिरावट : व्यापार कम]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p style="text-align: justify; "><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। चालू सप्ताह के दौरान हल्दी के भाव मंदे के साथ बोले गए। हालांकि मराठवाड़ा को छोड़कर अन्य उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर हल्दी की आवक घटने लगी है। क्योंकि अधिकांश माल मंडियों में आ चुका है। उल्लेखनीय है कि मराठवाड़ा में नए मालों की आवक अन्य क्षेत्रों की तुलना में देरी से शुरू होती है। वर्तमान में मराठवाड़ा में नए मालों की आवक अच्छी चल रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बसमत में नई हल्दी की आवक 8/10 हजार बोरी दैनिक की हो&nbsp; रही है जबकि हिंगोली में 7/8 हजार बोरी एवं नांदेड़ 7/8 हजार बोरी का दैनिक व्यापार हो रहा है। जबकि निजामाबाद में नई हल्दी की आवक घटकर 3000/3500 बोरी की रह गई है। सांगली में आवक 5/6 हजार बोरी की चल रही है। इरोड में आवक 5/6 हजार बोरी दैनिक हो रही है। सूत्रों का कहना है कि निजामाबाद लाइन पर अभी तक लगभग 9/10 लाख बोरी हल्दी की आवक हो चुकी है जबकि कुल उत्पादन 12/13 लाख बोरी होने के समाचार है। इसके अलावा ईरोड लाईन पर भी 8/9 लाख बोरी की आवक होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं चालू सीजन के दौरान ईरोड लाइन पर हल्दी का उत्पादन 13/14 लाख बोरी माना जा रहा है। सांगली लाइन पर कुल उत्पादन का 70/75 प्रतिशत माल आ चुका है। इस वर्ष सांगली लाइन पर हल्दी का उत्पादन 10/12 लाख बोरी माना जा रहा है। मराठवाड़ा लाइन पर इस वर्ष हल्दी उत्पादन 30/32 लाख बोरी होने के व्यापारिक अनुमान लगाए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि देर से आवक होने के कारण मराठवाड़ा लाइन पर अभी नई हल्दी की आवक अच्छी बनी रहेगी। इसके वारंगल लाइन पर आवक हो रही है लेकिन आशानुरूप नहीं है। वारंगल में आवक 2000/2500 बोरी की हो रही है। दुगीराला में आवक 1000/1500 बोरी की चल रही है।&nbsp;</span></p><p style="text-align: justify; "><b>कीमतों में गिरावट&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">हाजिर में कमजोर मांग के चलते हल्दी के दामों में गिरावट दर्ज की गई। उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर चालू सप्ताह के दौरान हल्दी के भाव 200/300 रुपए प्रति क्विंटल तक मंदे के साथ बोले गए। दिल्ली बाजार में भी हल्दी सिंगल पॉलिश गट्ठा का भाव घटकर 148/150 रुपए पर आ गया है जोकि एक सप्ताह पूर्व 150/152 रुपए चल रहा था। सूत्रों का कहना है कि मिडिल ईस्ट देशों में अशांति के चलते निर्यात प्रभावित हो रहा है। बांग्ला देश को छिटपुट निर्यात हो रहा है।&nbsp; संभावना व्यक्त की जा रही है कि आगामी दिनों में निर्यात मांग बढ़ने की स्थिति में हल्दी की कीमतों में अवश्य ही तेजी आने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। क्योंकि बकाया स्टॉक कम रह जाने के अलावा उत्पादन भी आशानुरूप नहीं होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। हालांकि इस वर्ष उत्पादक केन्द्रों पर बिजाई क्षेत्रफल में 30/35 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी लेकिन बिजाई के पश्चात मौसम प्रतिकूल होने के कारण फसल को नुकसान हुआ है।&nbsp;</p><p style="text-align: justify; "><b>निर्यात&nbsp;</b></p><p style="text-align: justify; ">चालू वित्त वर्ष 2025-26 के प्रथम दस माह अप्रैल-जनवरी 2026 के दौरान हल्दी का निर्यात 151933 टन का हुआ है और निर्यात से प्राप्त आय 2445.51 करोड़ की रही। जबकि गत वर्ष अप्रैल-जनवरी- 2025 में हल्दी का निर्यात 148691 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 2425.87 करोड़ की रही थी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान हल्दी का कुल निर्यात 176325 टन का रहा था।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32701</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 19:27:27 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[ऊंचे समर्थन मूल्य के सहारे कपास का रकबा बढ़ने की उम्मीद]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने कपास की बिजाई, उत्पादकता एवं पैदावार बढ़ाने के लिए एक तरफ विशाल धनराशि के साथ कॉटन मिशन आरंभ किया है तो दूसरी ओर इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में भी भारी बढ़ोत्तरी कर दी है। इससे किसानों को कपास का क्षेत्रफल एवं उत्पादन बढ़ाने का अच्छा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। कपास के एमएसपी&nbsp; में पिछले तीन साल से जबरदस्त बढ़ोत्तरी की जा रही है मगर इसका रकबा बढ़ने के बजाए घटता जा रहा है। इससे उत्पादन में भी कमी आ रही है।</span></p><p>2026-27 के मार्केटिंग सीजन के लिए केन्द्र सरकार ने कपास (रूई) के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 557 रुपए प्रति क्विंटल की जबरदस्त बढ़ोत्तरी कर दी है। इसके फलस्वरूप 2025-26 की तुलना में 2026-27 सीजन के लिए रूई का एमएसपी मीडियम ग्रेड के लिए 7710 रुपए से बढ़कर 8267 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली श्रेणी के लिए 8110 रुपए से बढ़कर 8667 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है।&nbsp;</p><p>रूई का थोक मंडी भाव अक्सर न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी नीचे रहता है (सीसीआई) को मंडियों में हस्तक्षेप करके किसानों से विशाल मात्रा में इसकी खरीद करनी पड़ती है। 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान सीसीआई द्वारा एमएसपी पर करीब 100 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) रूई की खरीद की गई।&nbsp;</p><p>ऊंचे समर्थन मूल्य से कपास के उत्पादकों को तो राहत मिलेगी लेकिन वस्त्र उद्योग की कठिनाई बढ़ जाएगी। ऊंचे दाम पर रूई खरीदने से वस्त्र उत्पादों का लागत खर्च बढ़ जाएगा जिससे अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धी क्षमता घट जाएगी। इससे निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। विदेशों से आयात बढ़ने की संभावना रहेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32699</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 18:01:20 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पश्चिम बंगाल में गंभीर जल संकट उत्पन्न होने की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">कोलकाता। दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन से पूर्व पश्चिम बंगाल में सूखे का संकट पैदा होने के संकेत मिल रहे हैं। बारिश के अभाव एवं ऊंचे तापमान के कारण राज्य के जल स्रोत सूखने लगे हैं। वहां बांधों-जलाशयों में कुल भंडारण क्षमता के मुकाबले केवल 12.5 प्रतिशत पानी का स्टॉक बचा हुआ है। इन जलाशयों का बड़ा भाग सूख गया है।&nbsp;</span></p><p>उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल देश का अग्रणी धान-चावल उत्पादक राज्य है और खरीफ सीजन के दौरान वहां विशाल क्षेत्रफल में इसकी खेती होती है। भू जल का अभाव होने के साथ-साथ भूमिगत जल का स्तर भी घटकर बहुत नीचे चला&nbsp; गया है जिससे किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए आगे कठिन संघर्ष करना पड़ सकता है।&nbsp;&nbsp;</p><p>बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर तो पूरे पूर्वी भारत में काफी घट गया है। वहां 27 प्रमुख जलाशयों में भंडारण क्षमता के मुकाबले केवल एक-तिहाई (33.5 प्रतिशत) पानी का स्टॉक बचा हुआ है। आसाम में यह 22 प्रतिशत तथा उड़ीसा में 28 प्रतिशत पर आ गया है। बिहार में भी जल स्तर बहुत नीचे है। इसके मुकाबले झारखंड, मेघालय एवं त्रिपुरा में स्थिति बेहतर है। किसानों को यह डर सता रहा है कि यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में बारिश कम हुई तो धान की फसल को भारी नुकसान हो सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32697</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 17:29:26 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मक्का को छोड़ अन्य मोटे अनाजों के एमएसपी में अच्छी बढ़ोत्तरी]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। हालांकि केन्द्र सरकार ने 2026-27 के खरीफ मार्केटिंग सीजन हेतु मोटे अनाजों के संवर्ग में ज्वार, बाजरा एवं रागी के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी कर दी है मगर सबसे प्रमुख सदस्य- मक्का के समर्थन मूल्य को केवल 10 रुपए प्रति क्विंटल ही बढ़ाया है।&nbsp;</span></p><p>मक्का एक बहुपयोगी मोटा अनाज है। पहले इसका उपयोग मानवीय खाद्य उद्देश्य के साथ-साथ पॉल्ट्री फीड, पशु आहर तथा स्टार्च निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता था और अब भी किया जा रहा है जबकि पिछले दो-तीन साल से एथनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित-प्रोत्साहित किया और इसका सार्थक परिणाम भी सामने आया। मक्का के घरेलू उत्पादन&nbsp; में शानदार बढ़ोत्तरी हुई।&nbsp;</p><p>लेकिन सरकार की नई घोषणा से स्पष्ट संकेत मिलता है कि अब मक्का के उत्पादन को हतोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। मक्का का घरेलू बाजार भाव पहले ही घटकर एमएसपी से काफी नीचे आ चुका है और केन्द्र सरकार किसानों को मूल्य समर्थन योजना का लाभ देने का कोई गंभीर प्रयास नहीं कर रही है। एथनॉल निर्माता भी सस्ते दाम पर मक्का खरीदने का प्रयास कर रहे हैं। इस वर्ष खरीफ सीजन में मक्का की बिजाई एवं पैदावार पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।&nbsp;</p><p>केन्द्र सरकार ने 2025-26 के मुकाबले 2026-27 सीजन के लिए हाइब्रीड ज्वार का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3699 रुपए से बढ़ाकर 4023 रुपए प्रति क्विंटल तथा मलदंडी ज्वार का 3749 रुपए से बढ़ाकर 4073 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इस तरह ज्वार के समर्थन मूल्य में 324 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इसी तरह बाजरा का एमएसपी 2775 रुपए से 125 रुपए बढ़ाकर 2900 रुपए प्रति क्विंटल तथा रागी का समर्थन मूल्य 4886 रुपए स 319 रुपए बढ़ाकर 5205 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है। लेकिन मक्का के एमएसपी में महज 10 रुपए की मामूली बढ़ोत्तरी की गई है जिससे यह 2400 रुपए से सुधरकर 2410 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32695</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 17:26:45 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पेट्रोल-डीजल के दाम में हुई वृद्धि से महंगाई बढ़ने की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। भारतीय की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) इंडियन ऑयल कार्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने डीजल तथा पेट्रोल के दाम में 3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है जिससे परिवहन (माल ढुलाई) खर्च में वृद्धि हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि पिछले 49 महीनों से पेट्रोल-डीजल का खुदरा मूल्य स्थिर बना हुआ था।&nbsp;</span></p><p>क्रूड खनिज तेल (पेट्रोलियम) के वैश्विक बाजार मूल्य में तेजी आने के बाद भारत में भी पेट्रोल-डीजल का दाम बढ़ना निश्चित माना जा रहा था। कुछ दिन पूर्व पेट्रोलियम मंत्री ने इसके संकेत भी दिए थे। </p><p>क्रूड खनिज तेल का भाव फरवरी में 69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहा था जो अब बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है। पश्चिम एशिया में जारी संकट तथा होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण पेट्रोल की आपूर्ति में बाधा पड़ रही है। डॉलर के मुकाबले रुपए का भारी अवमूल्यन होने से आयात खर्च और भी बढ़ गया है।&nbsp;</p><p>मार्च की तुलना में अप्रैल के दौरान थोक मूल्य सूचकांक एवं खुदरा मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई की दर ऊंची रही जबकि मई में इसके और भी बढ़ने की संभावना है। जानकारों का कहना है कि डीजल-पेट्रोल के दाम में आगे और इजाफा किया जा सकता है जिससे महंगाई का ग्राफ ऊपर चढ़ सकता है। माल ढुलाई के लिए किराया भाड़ा में वृद्धि होने से सभी उत्पाद स्वाभाविक रूप से महंगे हो जाएंगे जिसका गंभीर खामियाजा कमजोर वर्ग के लोगों यानी उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ सकता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32693</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:14:38 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[दक्षिण भारत के बांधों में पानी के स्टॉक में चिंताजनक स्तर तक गिरावट]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। दक्षिण भारत के बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक चिंताजनक स्तर तक घट गया है और लम्बे समय से वहां अच्छी बारिश का अभाव देखा जा रहा है। दूसरी ओर लगातार बढ़ते तापमान एवं भीषण गर्मी के प्रकोप से खासकर बागानी फसलों को नुकसान हो रहा है जिसमें चाय, कॉफी, प्राकृतिक रबड़, सुपारी एवं छोटी इलायची सहित अन्य मसाला&nbsp; फसल भी शामिल है। छोटी इलायची के नए माल की तुड़ाई-तैयारी आमतौर पर जून के अंत या जुलाई के आरंभ में शुरू हो जाती है।&nbsp;</span></p><p>दक्षिण भारत के 47 प्रमुख जलाशयों में फिलहाल केवल 14.051 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक बचा हुआ है जो इसकी कुल भंडारण क्षमता 55.288 बीसीएम का महज 25 प्रतिशत है। इसमें भी तेलंगाना की हालत सबसे खराब बताई जा रही है क्योंकि उसके जलाशयों में कुल भंडारण क्षमता के मुकाबले सिर्फ 20 प्रतिशत पानी का स्टॉक मौजूद है। पानी का स्टॉक कर्नाटक के बांधों में 22 प्रतिशत, केरल में 24 प्रतिशत, तमिलनाडु में 34.5 प्रतिशत तथा आंध्र प्रदेश के जलाशयों में 37 प्रतिशत बचा हुआ है। </p><p>अगर शीघ्र ही वहां उच्च बारिश नहीं हुई तो बांधों-सरोवरों में जल स्तर घटकर और भी नीचे आ जाएगा। कुछ जलाशयों में पानी का स्टॉक इतना कम है कि उसके सूखने का खतरा पैदा हो गया है। इससे पेयजल की आपूर्ति के साथ फसलों की सिंचाई के लिए पानी का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।&nbsp;</p><p>उल्लेखनीय है कि तेलंगाना दक्षिण भारत में धान-चावल का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है। वहां धान की खेती मुख्यतः जलाशयों के पानी पर आश्रित रहती है जिसमें इस बार पानी का बहुत कम स्टॉक बचा हुआ है। वहां तेलंगाना कपास के उत्पादन में भी सबसे आगे है। खेतों की मिटटी सख्त हो गई है क्योंकि उसमें नमी नहीं है। अगले महीने से दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश शुरू होने की संभावना है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32691</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:09:09 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चावल का वैश्विक उत्पादन 54.01 करोड़ टन होने का अनुमान]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-54-01-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी ने 2024-25 सीजन की तुलना में 2025-26 सीजन के दौरान चावल का वैश्विक उत्पादन 0.1 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 54.01 करोड़ टन होने की संभावना व्यक्त की है जो अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) द्वारा लगाए गए अनुमान 54.28 करोड़ टन से 27 लाख टन कम है। एजेंसी का मानना है कि भारत, वियतनाम तथा थाईलैंड जैसे देशों में उत्पादन की स्थिति सामान्य रह सकती है मगर पाकिस्तान अमरीका एवं ब्राजील सहित कुछ अन्य देशों में पैदावार उत्साहवर्धक नहीं होगी।&nbsp;</span></p><p>रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में फिलहाल मौसम की स्थिर हालत एवं उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता के कारण किसानों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। उर्वरकों का दाम भी स्थिर रखा जा रहा है। विश्व स्तर पर चावल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। भारत में अल नीनो का असर अगस्त से बढ़ सकता है जबकि तब तक खरीफ कालीन धान की खेती काफी हद तक पूरी हो सकती है। </p><p>चीन और वियतनाम में भी यही स्थिति रहेगी। लेकिन उसके बाद भारत और थाईलैंड में धान की दूसरी फसल (रबी कालीन) तथा बांग्ला देश एवं इंडोनेशिया में मुख्य फसल की खेती प्रभावित हो सकती है। इससे कई देशों में चावल का उत्पादन घट सकता है।</p><p>रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 के मुकाबले 2025-26 सीजन की समाप्ति पर चावल का वैश्विक बकाया स्टॉक 0.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 19.23 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। चावल की वैश्विक खपत 2.1 प्रतिशत बढ़कर 53.55 करोड़ टन पर पहुंचेगी। चावल की मांग आगे भी मजबूत रहेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32689</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 15:42:00 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मलेशिया में जून के लिए सीपीओ पर निर्यात टैक्स 10 प्रतिशत पर बरकरार]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-10-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">कुआलालम्पुर। इंडोनेशिया के बाद दुनिया में पाम तेल के दूसरे सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- मलेशिया में रिफ्रेंस मूल्य के आधार पर मई की भांति जून 2026 के लिए भी क्रूड पाम तेल (सीपीओ) पर निर्यात टैक्स को 10 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर रखा गया है। हालांकि यह रिफ्रेंस मूल्य मई के लिए 4521.89 रिंगिट प्रति टन आंका गया था जबकि जून के लिए 4372.64 रिंगिट प्रति टन ही आंका गया है लेकिन मलेशिया में 1 नवम्बर 2024 से प्रचलित नियम के अनुसार यदि सीपीओ का रिफ्रेंस मूल्य 4050 रिंगिट प्रति टन से ऊपर होगा तो उस पर 10 प्रतिशत का निर्यात टैक्स स्वतः प्रभावी&nbsp; हो जाएगा।</span></p><p>प्रचलित नियम के मुताबिक यदि सीपीओ का रिफ्रेंस मूल्य 2250 रिंगिट प्रति टन से नीचे रहेगा तो उस पर कोई निर्यात टैक्स नहीं लगेगा। अगर रिफ्रेंस मूल्य 2250 से 2400 रिंगिट प्रति टन के बीच होगा तो उस पर 3 प्रतिशत का निर्यात टैक्स प्रभावी माना जाएगा। </p><p>निर्यात टैक्स के लिए रिफ्रेंस मूल्य का यह आधार स्तर है और आगे इसमें जितना इजाफा होगा, निर्यात टैक्स भी उतना ही बढ़ता जाएगा। वैसे इसकी उच्चतम सीमा 10 प्रतिशत निर्धारित की गई है जो 4050 रिंगिट प्रति टन के बाद के रिफरेंस मूल्य पर प्रभावी होगी।</p><p>मलेशिया से पाम तेल का निर्यात प्रदर्शन कमजोर चल रहा है। वहां सीपीओ का वायदा भाव ऊंचे स्तर पर होने से भारत सहित अनेक आयातक देशों में इसकी मांग कमजोर पड़ गई है। </p><p>इसके अलावा होर्मुज जल डमरू मध्य से जहाजों की आवाजाही बंद होने से पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व तथा खाड़ी क्षेत्र के देशों में मलेशियाई पाम तेल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। ऊंचे निर्यात टैक्स से भी समस्या बढ़ रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32687</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 15:13:54 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[पहली छमाही में ऑस्ट्रेलिया से करीब 10.85 लाख टन मसूर का निर्यात]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-10-85-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मेलबोर्न। ऑस्ट्रेलिया से मसूर का निर्यात अब तेजी से घटने लगा है। फरवरी की तुलना में मार्च का शिपमेंट काफी कमजोर रहा। भारत तथा संयुक्त अरब अमीरात में इसका निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से ऑस्ट्रेलियाई निर्यातकों की कठिनाई काफी बढ़ गई है।&nbsp;</span></p><p>ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (एबीएस) की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान मार्केटिंग सीजन की पहली छमाही में यानी अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान ऑस्ट्रेलिया से कुल मिलाकर करीब 10.85 लाख टन मसूर का निर्यात हुआ जिसमें अक्टूबर-दिसम्बर 2025 की तिमाही में 5.45 लाख टन, जनवरी 2026 में 2.81 लाख टन, फरवरी में 1.74 लाख टन तथा मार्च 2026 में 85 हजार टन का शिपमेंट शामिल था।&nbsp;</p><p>इस 10.85 लाख टन के कुल निर्यात में से 4,82,654 टन मसूर का शिपमेंट अकेले भारत को किया गया। भारत में ऑस्ट्रेलिया से अक्टूबर-दिसम्बर की तिमाही में 2,38,675 टन, जनवरी में 1,59,008 टन तथा फरवरी में 78,971 टन मसूर का आयात हुआ था जो मार्च 2026 में लुढ़ककर मात्र 6000 टन रह गया।&nbsp;</p><p><span style="font-size: 1rem;">समीक्षाधीन छमाही के दौरान ऑस्ट्रेलिया से भारत के अलावा बांग्ला देश को 3,22,284 टन, मिस्र को 61,943 टन, नेपाल को 35484 टन, पाकिस्तान को 33,901 टन, श्रीलंका को 85,895 टन तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को 56,894 टन मसूर का निर्यात हुआ जबकि शेष दलहन अन्य देशों को भेजा गया। ऑस्ट्रेलिया में अभी मसूर का अच्छा खासा निर्यात योग्य स्टॉक मौजूद है।</span></p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32685</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 13:53:47 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[चीनी के निर्यात पर अचानक प्रतिबंध लगने से उद्योग को भारी झटका]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। केन्द्र सरकार द्वारा चीनी के निर्यात पर अचानक 30 सितम्बर 2026 तक रोक लगाने की घोषणा किए जाने से स्वदेशी उद्योग स्तब्ध एवं हैरान है। अभी फरवरी में ही तो सरकार ने चीनी का निर्यात कोटा 5 लाख टन बढ़ाने का निर्णय लिया था जबकि मध्य मई से पूर्व ही पूरे निर्यात को रोकने का फैसला कर लिया।&nbsp;</span></p><p>कुछ समीक्षकों का कहना है कि घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाए रखने तथा कीमतों में संभावित तेजी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सरकार ने चीनी का निर्यात रोकने का फैसला किया है जबकि कुछ अन्य विश्लेषकों ने सरकारी निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि इससे भविष्य में गन्ना उत्पादकों का हित प्रभावित हो सकता है।&nbsp;</p><p>कुछ जानकारों ने तो यहां तक कहा है कि निर्यात पर रोक लगाने के बावजूद सरकार को अपने उदेश्य को हासिल करने में सफलता शायद नहीं मिल पाएगी। पिछले कुछ सप्ताहों के अंदर चीनी का एक्सफैक्टरी मूल्य 3500-3600 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 3800-4000 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंचा है और इसमें तत्काल गिरावट आना मुश्किल लगता है। </p><p>2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन में चीनी का घरेलू उत्पादन उम्मीद से काफी कम होने का अनुमान है और सीजन के अंत में उद्योग के पास बकाया स्टॉक भी ज्यादा नहीं बचेगा। अगले सीजन के उत्पादन का परिदृश्य भी धुंधला नजर आ रहा है।</p><p>2025-26 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान चीनी का सकल उत्पादन (खाद्य उद्देश्य के लिए) 279.50 लाख टन पर सिमटने की संभावना है जबकि पहले 309.50 लाख टन और फिर 290 लाख टन के उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। </p><p>मार्केटिंग सीजन के अंत में यानी 30 सितम्बर 2026 को उद्योग के पास चीनी का बकाया स्टॉक घटकर 38-39 लाख टन रह जाने का अनुमान है जो पिछले साल 50 लाख टन आंका गया था। निर्यात प्रतिबंध से करीब&nbsp; 12-15 लाख टन चीनी की बचत का अवसर मिल सकता है लेकिन इससे कुल उपलब्धता की स्थिति कितनी सुधरती है यह देखना दिलचस्प होगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32683</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 13:07:17 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मार्च तक भारत में ऑस्ट्रेलिया से 9.45 लाख टन चना का आयात]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-9-45-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">ब्रिसबेन। पिछले मार्केटिंग सीजन की भांति 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में भी भारत ऑस्ट्रेलिया चना का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है। सरकारी संस्था- ऑस्ट्रेलियाई संख्यिकी ब्यूरो (एबीएस) के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू मार्केटिंग सीजन की पहली छमाही में यानी अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 के दौरान ऑस्ट्रेलिया से कुल मिलाकर 14,59,514 टन चना का निर्यात हुआ जिसमें से अकेले भारत को 9,45,421 टन का शिपमेंट किया गया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">भारत में ऑस्ट्रेलिया से अक्टूबर-दिसम्बर 2025 की तिमाही में 6,40,180 टन, देसी चना का आयात हुआ था जबकि जनवरी 2026 में 70,638 टन, फरवरी में 2,27,624 टन तथा मार्च 2026 में 6979 टन चना मंगाया गया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">दरअसल भारत की मांग एवं खरीद की बदौलत ही ऑस्ट्रलिया से चना का शानदार निर्यात हो रहा है। लेकिन अब वहां उत्पादकों ने चना के अपने बचे हुए स्टॉक को रोकना शुरू कर दिया है। ज्ञात हो की ऑस्ट्रलिया दुनिया में चना का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है।&nbsp;</span></p><p>अक्टूबर 2025- मार्च 2026 की छमाही के दौरान ऑस्ट्रेलिया से बांग्ला देश को 2,15,368 टन, पाकिस्तान को 2,02,151 टन तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को 55,324 टन चना का शिपमेंट हुआ जबकि थोड़ी-बहुत मात्रा में इसका निर्यात&nbsp; कई अन्य देशों को किया गया। </p><p>भारत में नई फसल की जोरदार आवक शुरू होने तथा कीमतों में नरमी के साथ स्थिरता आने के कारण मार्च में चना का आयात घटकर 7 हजार टन पर सिमट गया। ऑस्ट्रेलिया में आगामी फसल के लिए चना की बिजाई आरंभ हो चुकी है जबकि भारत में नए माल की अच्छी आवक हो रही है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32681</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 12:24:21 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गेहूं की सरकारी खरीद चार वर्षों के शीर्ष स्तर पहुंची]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। वर्तमान रबी मार्केटिंग सीजन में 13 मई 2026 तक केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की कुल खरीद बढ़कर 306.12 लाख टन पर पहुंच गई जो न केवल पिछले सीजन की समान अवधि की खरीद 292.60 लाख टन से काफी अधिक है बल्कि पिछले चार वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर भी है। सरकार ने इस बार 345 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है जिसका 89 प्रतिशत भाग अब तक हासिल हो चुका है। खरीद की प्रक्रिया अभी जारी है।</span></p><p>आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में मौजूद रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान गेहूं की सरकारी खरीद पंजाब में 118.17 लाख टन से बढ़कर 121.62 लाख टन, हरियाणा में 70.69 लाख टन से उछलकर 80.93 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 9.85 लाख टन से बढ़कर 12.08 लाख टन तथा राजस्थान में 15.83 लाख टन से सुधरकर 16.64 लाख टन पर पहुंच गई। </p><p>हालांकि मध्य प्रदेश में गेहूं की खरीद गत वर्ष के 77.74 लाख टन से घटकर 73.99 लाख टन रह गई मगर हाल के सप्ताहों में गिरावट के अंतर में भारी कमी आ गई है। बिहार में भी गेहूं की खरीद 17 हजार टन से बढ़कर 30 हजार टन पर पहुंची है।&nbsp;</p><p>हरियाणा में गेहूं की खरीद 72 लाख टन के नियत लक्ष्य से 12 प्रतिशत अधिक हुई है जबकि पंजाब में भी लक्ष्य लगभग हासिल हो चुका है। इसके अलावा मध्य प्रदेश में 74 प्रतिशत, राजस्थान में 71 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 48 प्रतिशत एवं बिहार में 17 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति हुई है।&nbsp;</p><p>पिछले साल कुल मिलाकर रबी मार्केटिंग सीजन में 301 लाख टन से कुछ अधिक गेहूं खरीदा गया था जबकि 2024 में 262 लाख टन, 2023 में 260 लाख टन एवं 2022 में 188 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी। कुछ राज्यों में गेहूं की खरीद अगले महीने तक जारी रहेगी।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32677</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 11:43:39 +0530</pubDate>
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                    <item>
                <title><![CDATA[बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर 35 प्रतिशत से नीचे आया]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/---35-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। बारिश की कमी, बढ़ती गर्मी एवं नियमित निकासी के कारण देश भर के 166 प्रमुख बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक घटकर उसकी कुल भंडारण क्षमता के 35 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है। इसे कृषि क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है क्योंकि खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति पर इसका असर पड़ सकता है।&nbsp;</span></p><p>केन्द्रीय जल आयोग के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि 166 प्रमुख बांधों-जलाशयों में पानी का कुल स्टॉक घटकर 63,232 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) रह गया है जो उसकी कुल भंडारण क्षमता 183.565 बीसीएम का 34.45 प्रतिशत है। </p><p>60 प्रतिशत से अधिक जलाशयों में पानी का स्तर 40 प्रतिशत से नीचे है। इसके बावजूद यह जल स्तर गत वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 13 प्रतिशत तथा दस वर्षीय औसत स्तर की तुलना में 24 प्रतिशत ज्यादा है।</p><p>भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि चालू वर्ष में 1 मार्च से 13 मई के दौरान देश के 725 जिलों में से 27 प्रतिशत जिलों में बारिश नहीं या नगण्य हुई। इससे पूर्व जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान देश के कम से कम 70 प्रतिशत भाग में वर्षा का भारी अभाव रहा था। इसके फलस्वरूप बांधों में जल स्तर नियमित रूप से घटता जा रहा है। </p><p>अगले महीने से खरीफ फसलों की बिजाई औपचारिक तौर पर आरंभ होने वाली है जबकि मानसून-पूर्व की बारिश सामान्य से कम हुई है। खेतों की मिटटी में नमी का अभाव है और किसानों को दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा का ही सहारा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/32675</guid>				
                <pubDate>Fri, 15 May 2026 11:16:06 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

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