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        <title><![CDATA[ Igrain India ]]></title>
        <link><![CDATA[ https://igrain.in/feeds ]]></link>
        <description><![CDATA[ Igrain India ]]></description>
        <language>en</language>
        <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 17:35:18 +0530</pubDate>
  
                    <item>
                <title><![CDATA[राजस्थान में खरीफ फसलों का बिजाई क्षेत्र 15 प्रतिशत पीछे]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-15-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">जयपुर। पश्चिम भारत में अवस्थित राजस्थान देश में मूंग, बाजरा, मोठ, चौला तथा ग्वार का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है जबकि मूंगफली के उत्पादन में गुजरात के बाद दूसरे नंबर पर तथा सोयाबीन की पैदावार में मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र से पीछे तीसरे स्थान पर रहता है।</span></p><p>पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 15 जुलाई तक राजस्थान में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 129.41 लाख हेक्टेयर से 15 प्रतिशत या 21.87 लाख हेक्टेयर घटकर 107.54 लाख हेक्टेयर रह गया। </p><p>राज्य कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान मध्य जुलाई तक राजस्थान में धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूंग, मोठ, चौला, तुवर, तिल, सोयाबीन, कपास एवं ग्वार के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट आ गई जबकि उड़द, मूंगफली और अरंडी का बिजाई क्षेत्र बढ़ गया। खरीफ फसलों की बिजाई अभी जारी है।&nbsp;</p><p>इस वर्ष राज्य में खरीफ फसलों का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 160.10 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि वास्तविक रकबा 108 लाख हेक्टेयर से भी पीछे रहा। यदि आगामी समय में मानसून की अच्छी वर्षा हुई तो राज्य में किसानों को रकबा सुधारने का अवसर मिल सकता है अन्यथा कुछ क्षेत्रों में बिजाई पीछे रह सकती है। बिजाई का आदर्श समय अभी समाप्त नहीं हुआ है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35295</guid>				
                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 16:58:30 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[वर्षा की कमी का दायरा बढ़ना जारी]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। दक्षिण पश्चिम मानसून की बेहद कमजोर स्थिति के कारण देश में दैनिक तथा सीजनल आधार पर वर्षा की कमी का दायरा पुनः बढ़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार 15 जुलाई को देश में महज 4.3 मि०मी० बारिश हुई जो सामान्य औसत स्तर 10 मि०मी० से 57 प्रतिशत कम रही। चालू सप्ताह के आरंभ से ही बारिश में भारी गिरावट देखी जा रही है।&nbsp;</span></p><p>मौसम विभाग के मुताबिक इस वर्ष / जून से 16 जुलाई के दौरान देश में कुल 231.3 मि०मी० वर्षा दर्ज की गई जो दीर्घकालीन औसत (एलपीए) 304.2 मि०मी० से 24 प्रतिशत कम रही। देश के अधिकांश भागों से मानसून गायब हो गया है जबकि भीषण गर्मी का दौर अभी जारी है। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले सप्ताह मानसून की सक्रियता पुनः बढ़ सकती है और देश के कई राज्यों में अच्छी बारिश हो सकती है क्योंकि एक तरफ बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दाब का क्षेत्र बन रहा है जो डिप्रेशन में बदल सकता है और इससे मानसून को अच्छी ताकत मिलेगी। दूसरी ओर पश्चिमोत्तर दिशा में दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है जो आगे बढ़कर पूरब की और से आने वाले मानसूनी प्रवाह के साथ मिल सकता है।&nbsp;</p><p>16 जुलाई को देश के चारों मौसम संभागों में मानसून की वर्षा सामान्य औसत से कम या बहुत कम हुई। वर्षा की कमी दक्षिणी प्रायद्वीप में 95 प्रतिशत दर्ज की गई। वहां 10 मौसम उपखंडों में से 3 उपखंड में बारिश बिल्कुल नहीं हुई जबकि अन्य उपखंडों में भी बहुत कम वर्षा हुई।&nbsp;</p><p>पश्चिमोत्तर भारत में सामान्य औसत से 90 प्रतिशत कम वर्षा हुई। इसी तरह मध्यवर्ती राज्यों में बारिश की कमी 33 प्रतिशत देखी गई। मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ एवं पूर्वी मध्य प्रदेश में 17 से 21 जुलाई के दौरान तथा विदर्भ संभाग में 17-18 जुलाई के अत्यन्त मूसलाधार बारिश होने की संभावना व्यक्त की है जिससे कहीं-कहीं बाढ़ आ सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35293</guid>				
                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 15:53:52 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आगामी रबी सीजन में गेहूं का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। इस वर्ष तथा कथित सुपर अल नीनो का गंभीर प्रतिकूल असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर देखा जा रहा है जिससे खरीफ फसलों की बिजाई में जोरदार गिरावट आ गई है। अल नीनो का प्रभाव जनवरी-फरवरी 2027 तक बरकरार रहने का अनुमान है जिससे उत्तर-पूर्व मानसून की बारिश भी प्रभावित हो सकती है। </span></p><p>इस बीच अक्टूबर 2026 से खरीफ फसलों की कटाई के साथ रबी फसलों- गेहूं, जौ, चना, मसूर, मटर एवं सरसों आदि की बिजाई आरंभ हो जाएगी जो कमोबेश फरवरी 2027 के तीसरे सप्ताह तक जारी रह सकती है। यदि मौसम एवं मानसून की हालत अनुकूल नहीं रही तो रबी सीजन में गेहूं की बिजाई की गति सुस्त पड़ सकती है। हालांकि गेहूं को धान की भांति जल जमाव की जरूरत नहीं पड़ती है लेकिन इसकी बोआई एवं प्रगति के लिए खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद रहना आवश्यक है। </p><p>पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर में आयोजित व्हीट प्रॉडक्ट्स प्रोमोशन सोसायटी (डब्ल्यू पी पी एस) सी ई ओ कॉनक्लेव में विशेषज्ञों ने कहा कि इस वर्ष खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी देर से आरंभ होगी जिससे रबी फसलों की बिजाई में भी विलम्ब हो जाएगा। उसके बाद मौसम और जलवायु की भूमिका पर सबका ध्यान केन्द्रित रहेगा। </p><p>एक अग्रणी प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान एजेंसी के संचालक का कहना है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की हालत खराब है और सितम्बर तक वर्षा की कमी से खरीफ फसलों पर खतरा बना रह सकता है। यह वर्ष एक सूखे का साल साबित हो सकता है जिसका असर खरीफ पर ही नहीं बल्कि रबी फसलों पर भी पड़ने की आशंका है। </p><p>वैसे मौसम विभाग ने वर्ष 2016 से ही किसी भी साल को सूखा ग्रस्त वर्ष घोषित करना बंद कर रखा है। वैसे अच्छी बात यह है कि हिन्द महासागर का डायपोल घनात्मक होने वाला है जिससे सितम्बर-अक्टूबर के दौरान देश में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35291</guid>				
                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 15:49:15 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[यूरोपीय संघ में चाइनीज राइस फ्लोर की खेप नामंजूर]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">ब्रुसेल्स। यूरोपीय संघ ने चीन से आयातित चावल के आटे (राइस फ्लोर) की एक खेप को यह कहते हुए नामंजूर कर दिया है कि उस खेप में जीएमओ (जेनेटिकली मोडिफाइड ऑर्गेनिज्म उत्पाद की मौजूदगी है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">यूरोपीय संघ के "रेपिड अलर्ट सिस्टम फॉर फूड एंड फीड द्वारा इस आशय की एक सूचना जारी कर दी गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब चीन द्वारा भारतीय गैर बासमती चावल की कुछ खेपों को इसी बहाने के आधार पर अस्वीकार किया जा रहा है कि उसमें जीएम चावल का अंश उपस्थित है।&nbsp;</span></p><p>सर्वज्ञात तथ्य है कि भारत में जीएम चावल का उत्पादन आयात, कारोबार एवं उपयोग नहीं होता है इसलिए सामान्य चावल में इसकी उपस्थिति का कोई आधार ही नहीं बनता है। यूरोपीय संघ की अधिसूचना में कहा गया है कि नीदरलैंड (हॉलैंड) द्वारा चीन से हाइड्रोसाइज्ड राइस फ्लोर का आयात किया गया था लेकिन इसकी खेप में जीएमओ की उपस्थिति पाए जाने के बाद इसे अस्वीकार कर दिया गया।&nbsp;</p><p>स्मरणीय है कि चालू वर्ष के आरंभ में चीन ने भारतीय गैर बासमती चावल की अनेक खेपों को जीएमओ की उपस्थिति के बहाने नामंजूर कर दिया था। हालांकि भारत में स्थित एक चाइनीज एजेंसी ने इन खेपों को क्लीयरेंस प्रदान किया था लेकिन फिर भी चीन के कस्टम अधिकारियों ने उसे स्वीकार नहीं किया। तब यह माना गया था कि चीन वैश्विक बाजार में भारतीय चावल को बदनाम करना चाहता है। वैसे चीन के इस प्रयास का कोई असर नहीं पड़ा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35288</guid>				
                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 13:35:39 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[गैर प्रतिस्पर्धी मूल्य के कारण सोयामील के निर्यात में भारी गिरावट]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। घरेलू थोक मंडियों में सोयाबीन का भाव काफी ऊंचा एवं तेज रहने से सोयामील का लागत खर्च बहुत बढ़ गया है जिससे इसका निर्यात ऑफर मूल्य अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों- अर्जेन्टीना, ब्राजील एवं अमरीका की तुलना में गैर प्रतिस्पर्धी तथा अनाकर्षक हो गया है।&nbsp;</span></p><p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 में देश से 62,844 टन सोया डीओसी का निर्यात हो सका जो अप्रैल 2025 के शिपमेंट 2,30,743 टन से काफी कम रहा। भारतीय बंदरगाहों पर सोयाबीन मील का फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य लगातार बढ़ता जा रहा है। </p><p>अप्रैल 2026 में वह 477 डॉलर प्रति टन था जो मई में बढ़कर 594 डॉलर प्रति टन तथा जून 2026 में उछलकर 621 डॉलर प्रति टन की ऊंचाई पर पहुंच गया। अन्य प्रतिद्वंदी आपूर्तिकर्त्ता देशों की तुलना में भारतीय सोयामील का निर्यात ऑफर मूल्य करीब 190 डॉलर प्रति टन ऊंचा चल रहा है जो आयातकों के लिए बड़ा अंतर है।&nbsp;</p><p>भारत में गैर जीएम सोयाबीन एवं सोयामील का उत्पादन होता है इसलिए इसका ऑफर मूल्य अन्य निर्यातक देशों की तुलना में ऊंचा रहता है। यदि मूल्यान्तर 50 से 100 डॉलर प्रति टन तक रहता है तो आयातक इसकी खरीद में दिलचस्पी दिखाते हैं लेकिन जब यह अंतर बढ़कर 150-200 डॉलर प्रति टन पर पहुंचता है तब खासकर दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में इसका आकर्षण घट जाता है और फलस्वरूप निर्यात प्रभावित होने लगता है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35286</guid>				
                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 12:46:32 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आधे से अधिक जलाशयों में 50 प्रतिशत से कम पानी का स्टॉक]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-50-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमजोर स्थिति तथा राष्ट्रीय स्तर पर वर्षा की अनिश्चित एवं अनियमित हालत के कारण देश के प्रमुख बांधों-जलाशयों में पानी के स्टॉक में अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। केन्द्रीय जल आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि देश के 166 प्रमुख जलाशयों में उसकी कुल भंडारण क्षमता के सापेक्ष 35 प्रतिशत से भी कम पानी का स्टॉक बचा हुआ है। इनमें से आधे से अधिक जलाशयों में 50 प्रतिशत से काफी कम पानी का भंडार है।&nbsp;</span></p><p>आयोग की रिपोर्ट के अनुसार इन 166 जलाशयों में फिलहाल 63.249 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक मौजूद है जो उसकी कुल भंडारण क्षमता 183.565 बीसीएम का 34.46 प्रतिशत है। केवल गुजरात का शत्रुंजय जलाशय पानी से भरा हुआ है जबकि तमिलनाडु का अधिवार डैम लगातार दूसरे सप्ताह भी पानी से खाली रहा।&nbsp;</p><p>भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालीन औसत की तुलना में मानसूनी वर्ष की कमी का स्तर बढ़कर 24 प्रतिशत पर पहुंच गया है। 15 जुलाई तक की स्थिति के अनुसार देश के 738 जिलों में से 59 प्रतिशत जिलों में बारिश नहीं या नगण्य हुई जिससे खरीफ फसलों की बिजाई काफी पिछड़ गई। </p><p>हालांकि 1 से 10 जुलाई के बीच देश के अनेक राज्यों में अच्छी बारिश हुई जिससे इसकी कमी का स्तर घटकर 12 प्रतिशत पर आ गया था लेकिन 11 से 16 जुलाई के बीच अधिकांश इलाकों में वर्षा का भारी अभाव देखा गया। 16 जुलाई को भी देश में सामान्य औसत से करीब 57 प्रतिशत कम वर्षा हुई। खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार बढ़ाने के लिए परिस्थितियां अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35284</guid>				
                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 11:56:06 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[बकाया स्टॉक के दबाव से कनाडा में मसूर का भाव नरम]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">सस्काटून। हालांकि कम बिजाई, मौसम की प्रतिकूल स्थिति और कीड़ों-रोगों के प्रकोप की आशंका से कनाडा में मसूर का उत्पादन घटने की संभावना है लेकिन उद्योग-व्यापार क्षेत्र इससे न तो ज्यादा चिंतित हैं और न ही भारी खरीद करने में दिलचस्पी दिखा रहा है। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">दरअसल पिछले साल कनाडा में मसूर का शानदार उत्पादन हुआ था और बेहतर निर्यात के बावजूद वहां इसका भारी-भरकम बकाया स्टॉक मौजूद है। अगले महीने से नई फसल भी आने वाली है।&nbsp;</span></p><p>विदेशी आयातक कनाडाई मसूर की खरीद में जल्दबाजी नहीं दिखा रहे हैं क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में इसका उत्पादन बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है। इससे मसूर के वैश्विक निर्यात बाजार में कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बीच जोरदार प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। </p><p>थोड़ी-बहुत चुनौती रूस, कजाकिस्तान एवं अमरीका की भी रहेगी। भारत में मसूर का आयात अपेक्षाकृत धीमी गति से हो रहा है लेकिन यदि तुवर के रकबे में गिरावट आई तो हरी मसूर का आयात बढ़ सकता है।</p><p> कनाडा में मसूर की पैदावार के बजाए क्वालिटी के प्रति ज्यादा चिंता देखी जा रही है। क्वालिटी प्रभावित होने पर अच्छे माल का अभाव हो सकता है और मूल्य मजबूत होने की संभावना रह सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35273</guid>				
                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 11:04:18 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से चावल के निर्यात में तेजी]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। कुछ ठोस कारकों के आधार पर भारतीय चावल के निर्यात ऑफर मूल्य में लगातार तीसरे सप्ताह तेजी-मजबूती का माहौल देखा जा रहा है। एक तो अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से मानसून की वर्षा कम होने के कारण खरीफ कालीन धान-चावल का उत्पादन घटने की आशंका है और दूसरे, केन्द्र सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत चावल का आधार आरक्षित मूल्य (बेस रिजर्व प्राइस) बढ़ा दिया है।&nbsp;</span></p><p>भारत के 5 प्रतिशत टूटे सेला संवर्ग के चावल का निर्यात ऑफर मूल्य बढ़कर 16 जुलाई को 352-357 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया जो पिछले सप्ताह 348-352 डॉलर प्रति टन चल रहा था। इसी तरह 5 प्रतिशत टूटे सफेद (कच्चा) चावल का निर्यात ऑफर मूल्य भी 353-357 डॉलर प्रति टन दर्ज किया गया। अन्य देशों को भी चावल का दाम बढ़ाने का अवसर मिल जाएगा।&nbsp;</p><p>बाजार को उम्मीद थी कि ओएमएसएस वाले चावल का रिजर्व मूल्य नीचे स्तर पर रखा जाएगा लेकिन इसका दाम बढ़ाने के सरकारी निर्णय के बाद खुले बाजार में भी चावल का भाव तेज हो गया। इससे निर्यातकों को ऊंची कीमत पर चावल की खरीद करने के लिए विवश होना पड़ रहा है।</p><p>धान के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट आने के संकेत मिल रहे हैं जबकि मानसूनी बारिश की हालत भी अनियमित एवं अनिश्चित बनी हुई है। रोपाई की गति आगे ही धीमी रहने की संभावना है। उधर बांग्ला देश में भयंकर बाढ़ आने के कारण कम से कम 28,610 हेक्टेयर में धान की फसल क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिल रही है। वहां 12 जिलों में बाढ़ का प्रकोप रहा।&nbsp;</p><p>थाईलैंड में 5 प्रतिशत टूटे सफेद चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 445-450 डॉलर प्रति टन के बीच चल रहा है जबकि गत सप्ताह भी 450 डॉलर प्रति टन ही रहा था। लेकिन इसकी निर्यात मांग कमजोर बनी हुई है। दूसरी ओर शुष्क सीजन के धान की नई फसल की आवक शुरू होने से चावल की आपूर्ति में वृद्धि हो रही है। वियतनाम के 5 प्रतिशत टूटे चावल का निर्यात ऑफर मूल्य 445-450 डॉलर प्रति टन के पिछले स्तर पर ही स्थिर बना हुआ है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35271</guid>				
                <pubDate>Fri, 17 Jul 2026 10:46:50 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[मौसम की प्रतिकूल स्थिति से काबुली चना का भाव मजबूत]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">टोरंटो। पश्चिमी कनाडा एवं अमरीका के महत्वपूर्ण उत्पादक क्षेत्रों में मौसम की हालत प्रतिकूल होने से काबुली चना की फसल के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है जिससे इसकी कीमत मजबूत बनी हुई है। उत्पादन में गिरावट आने से ज्यादा चिंता इसकी क्वालिटी की है। खराब मौसम एवं कीड़ों-रोगों के प्रकोप से काबुली चना के दाने की क्वालिटी प्रभावित होने की आशंका है।&nbsp;</span></p><p>व्यापार विश्लेषकों के अनुसार कनाडा में काबुली चना की पंचवर्षीय औसत उपज दर इस बार 24 बुशेल प्रति एकड़ आंकी गई है। यदि वास्तविक उत्पादकता इस स्तर पर पहुंचती है तब भी वहां कुल उत्पादन में गत वर्ष के मुकाबले लगभग 27 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। गत वर्ष कनाडा में काबुली चना का शानदार उत्पादन हुआ था और बेहतर निर्यात प्रदर्शन के बावजूद वहां इसका अच्छा खासा बकाया स्टॉक मौजूद है।</p><p>आपूर्ति एवं उपलब्धता की सुगम स्थिति को देखते हुए काबुली चना की कीमतों में जोरदार तेजी आने की नगण्य संभावना है लेकिन उत्पादन घटने की संभावना का कुछ मनोवैज्ञानिक असर बाजार पर अस्थायी रूप से पड़ सकता है। कनाडाई काबुली चना के तीन शीर्ष आयातक देशों- पाकिस्तान, अमरीका एवं तुर्की शामिल है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35245</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 20:23:25 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अप्रैल में चीन रहा भारतीय ऑयल मील का सबसे बड़ा खरीदार]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। अप्रैल 2025 में देश से करीब 4.66 लाख टन ऑयल मील का निर्यात हुआ था जो अप्रैल 2026 में करीब एक लाख टन या 22 प्रतिशत घटकर 3.66 लाख टन के आसपास रह गया। इस अवधि के दौरान चीन, बांग्ला देश एवं वियतनाम में भारतीय ऑयल मील के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई लेकिन थाईलैंड और दक्षिण कोरिया में शिपमेंट काफी घट गया।&nbsp;</span></p><p>सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल 2025 की तुलना में अप्रैल 2026 के दौरान भारत से ऑयल मील का निर्यात चीन में 59.921 टन से 138.12 प्रतिशत उछलकर 1,42,689 टन, बांग्ला देश में 50,191 टन से 38 प्रतिशत बढ़कर 69,272 टन तथा वियतनाम में 21,091 टन से 134 प्रतिशत उछलकर 49,350 टन पर पहुंच गया। दूसरी ओर थाईलैंड में ऑयल्ड मील का निर्यात 27,924 टन से 44.52 प्रतिशत गिरकर 15,491 टन तथा दक्षिण कोरिया में 68,948 टन से 87.60 प्रतिशत घटकर 8555 टन रह गया।&nbsp;</p><p>इस तरह अप्रैल 2026 में चीन, बांग्ला देश एवं वियतनाम से 1,41,691 टन खल सरसों (रेपसीड मील) तथा 998 टन सोयामील का आयात किया जबकि बांग्ला देश ने भी 60,157 टन रेपसीड मील तथा 8204 टन सोयामील मंगाया। इसके अलावा वहां 911 टन राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन का भी आयात किया गया। जहां तक वियतनाम की बात है तो अप्रैल 2026 में वहां भारत से 27,108 टन राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन, 20,474 टन रेपसीड मील तथा 1638 टन सोयामील का शिपमेंट किया गया।&nbsp;</p><p>सोयामील का निर्यात ऑफर मूल्य काफी ऊंचा रहने से अप्रैल में इसका शिपमेंट काफी घट गया। दूसरी ओर रेपसीड मील का ऑफर मूल्य काफी हद तक प्रतिस्पर्धी या आकर्षक स्तर पर रहा। एक और अच्छी बात यह यह है कि भारत से राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन का निर्यात तेजी से बढ़ने लगा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35243</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 20:21:02 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[तेलंगाना में खरीफ फसलों की बिजाई गत वर्ष से कुछ पीछे]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">हैदराबाद। दक्षिण भारत में धान एवं कपास के सबसे प्रमुख तथा मक्का, अरहर (तुवर) एवं सोयाबीन के एक महत्वपूर्ण उत्पादक राज्य- तेलंगाना में वर्षा की कमी के कारण खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र इस बार 15 जुलाई तक घटकर 59.84 लाख एकड़ पर अटक गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 60.95 लाख एकड़ से 1.11 लाख एकड़ कम है।&nbsp;</span></p><p>राज्य कृषि विभाग द्वारा जारी नई साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान मध्य जुलाई तक तेलंगाना में धान का उत्पादन क्षेत्र 7.78 लाख एकड़ से घटकर 6.40 लाख एकड़, मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र 4.78 लाख एकड़ से गिरकर 5.81 लाख एकड़ रह गया जबकि दलहनों का क्षेत्रफल 3.97 लाख एकड़ से बढ़कर 4.11 लाख एकड़,</p><p> तिलहन फसलों का रकबा 3.32 लाख एकड़ से सुधरकर 3.39 लाख एकड़ तथा कपास का उत्पादन क्षेत्र 38.57 लाख एकड़ से उछलकर इस बार 41.12 लाख एकड़ पर पहुंच गया। इसी तरह राज्य में गन्ना का रकबा भी गत वर्ष के 9.50 एकड़ से उछलकर इस बार 36,186 एकड़ पर पहुंच गया।&nbsp;</p><p>मोटे अनाजों में ज्वार का बिजाई क्षेत्र 28 हजार एकड़ से गिरकर 17 हजार एकड़ तथा मक्का का रकबा 4.50 लाख एकड़ से घटकर 3.64 लाख एकड़ पर अटक गया। रागी की खेती सीमित क्षेत्रफल में हुई है।&nbsp;</p><p>दलहन फसलों में अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 3.44 लाख एकड़ से बढ़कर इस बार 3.54 लाख एकड़ तथा मूंग का रकबा 40 हजार एकड़ से सुधरकर 45 हजार एकड़ पर पहुंचा लेकिन उड़द का बिजाई क्षेत्र 13 हजार एकड़ से गिरकर 11 हजार एकड़ पर सिमट गया।</p><p>जहां तक तिलहन फसलों की बात है तो सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 3.31 लाख एकड़ से सुधरकर 3.36 लाख एकड़ हो गया जबकि मूंगफली एवं अरंडी की खेती कम क्षेत्रफल में हुई है। बारिश के अभाव एवं बांधों-जलाशयों में पानी के घटते स्तर को देखते हुए तेलंगाना सरकार ने इस बार किसानों से धान के बजाए अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती पर ज्यादा जोर देने का सुझाव दिया है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35241</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 19:46:18 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आसान शब्दों में समझें रेल किराया-भाड़ा का गणित]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/---]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। रेलवे बोर्ड ने देश के विभिन्न भागों में रेलवे के माध्यम से भेजे जाने वाले खाद्यान्न, आटा एवं दाल-दलहनों के लिए किराया-भाड़ा का जो नया फार्मूला बनाया है उसे आसान भाषा में समझना आवश्यक है।&nbsp;</span></p><p>1000 कि०मी० तक सामान भेजने पर प्रत्येक 1 कि०मी० के लिए 1.55 रुपए प्रति टन यानी 1550 रुपए का किराया मान्य होगा। इसके बाद 1000 से 3000 कि०मी० तक की दूरी के लिए प्रत्येक कि०मी० पर किराया 1.15 रुपए प्रति टन की दर से मान्य होगा। उदाहरण स्वरूप 1200 कि०मी० के लिए 1510 रुपए प्रति टन, 1500 कि०मी० के लिए 1450 रुपए प्रति टन, 2000 कि०मी० तक के लिए 1350 रुपए प्रति टन, 2500 कि०मी० तक के लिए 1250 रुपए प्रति टन तथा 3000 कि०मी० तक के लिए 1150 रुपए प्रति टन का किराया मान्य होगा। 3000 कि०मी० से अधिक दूरी तक माल भेजने का किराया भाड़ा 1150 रुपए प्रति टन पर ही स्थिर (निश्चित) रहेगा।</p><p>1000 से 3000 किमी के बीच की दूरी के लिए रेलवे का किराया 40 पैसे प्रति टन घटता जाएगा जो मध्यवर्ती 2000 कि०मी० से कम की दूरी के लिए भाड़ा क्रमश: 155 रुपए तथा 1.15 रुपए प्रति टन प्रति कि०मी० नियत रहेगा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35239</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:52:18 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[अप्रैल में ऑयल मील के निर्यात में 22 प्रतिशत की गिरावट]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-22-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वित्त वर्ष के प्रथम माह यानी अप्रैल 2026 में देश में कुल 3,56,560 टन ऑयल मील का निर्यात हुआ जो अप्रैल 2025 के शिपमेंट 4,65,863 टन से करीब एक लाख टन या 22 प्रतिशत कम रहा।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> समीक्षाधीन माह के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 2,30,743 टन से लुढ़ककर 62,844 टन मूंगफली एक्सट्रैक्शन का निर्यात 3127 टन से घटकर 318 टन तथा अरंडी मील का शिपमेंट 18,970 टन से गिरकर 16,241 टन पर अटक गया। </span></p><p><span style="font-size: 1rem;">दूसरी ओर इसी अवधि में खल सरसों (रेपसीड मील) का निर्यात 2,13,023 टन से बढ़कर 2,48,153 टन पर पहुंचा। अप्रैल 2026 में 38,004 टन राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन का शिपमेंट हुआ जबकि अप्रैल 2025 में इसका निर्यात बंद था।&nbsp;</span></p><p>एसोसिएशन के अनुसार लाल सागर के जल मार्ग से शिपिंग में बाधा उत्पन्न होने से ऑयल मील के निर्यात की गति धीमी रही। इसके अलावा कीमतों की दृष्टि से भारतीय सोयामील अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजार में अन्य आपूर्तिकर्ता देशों के मुकाबले काफी हद तक अनाकर्षक या गैर प्रतिस्पर्धी हो गया। भारतीय सोयामील का निर्यात ऑफर मूल्य उछलकर 605 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया जबकि रोटरडम तक पहुंच के लिए अन्य निर्यातक देशों के सोयामील का भाव 430 डॉलर प्रति टन ही चल रहा था।&nbsp;&nbsp;</p><p>लेकिन चीन की मजबूत मांग के कारण रेपसीड मील के निर्यात में कुछ बढ़ोत्तरी देखी गई। चीन नियमित रूप से अच्छी मात्रा में इसकी खरीद करता रहा है। राइस ब्रान एक्सट्रैक्शन के निर्यात पर लगा प्रतिबंध समाप्त होने के बाद इसका अच्छा शिपमेंट होने लगा है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35237</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:31:18 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र 8.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-8-90-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">विजयवाड़ा। दक्षिण भारतीय राज्य- आंध्र प्रदेश में खरीफ फसलों की बिजाई में इस बार अच्छी प्रगति देखी जा रही है। वहां इसका कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 15 जुलाई 2026 तक 8.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो 15 जुलाई 2025 तक के बिजाई क्षेत्र 7.00 लाख हेक्टेयर से 1.90 लाख हेक्टेयर ज्यादा है। इस बार आंध्र प्रदेश में धान, तुवर, मूंगफली एवं कपास के रकबे में अच्छी वृद्धि हुई है।&nbsp;</span></p><p>राज्य कृषि विभाग की नवीनतम साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन के दौरान धान का उत्पादन क्षेत्र 2.91 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.26 लाख हेक्टेयर, मोटे अनाजों का बिजाई क्षेत्र 68 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 70 हजार हेक्टेयर, दलहन फसलों का क्षेत्रफल 60 हजार हेक्टेयर से उछलकर 1.22 लाख हेक्टेयर, तिलहनों का रकबा 68 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 86 हजार हेक्टेयर तथा कपास का उत्पादन क्षेत्र 2.05 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.75 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।&nbsp;</p><p>मोटे अनाजों में मक्का का बिजाई क्षेत्र 54 हजार हेक्टेयर से गिरकर 50 हजार हेक्टेयर रह गया जबकि बाजरा का बिजाई क्षेत्र 10 हजार हेक्टेयर पर स्थिर रहा।&nbsp;</p><p>दलहन फसलों में अरहर (तुवर) का उत्पादन क्षेत्र 49 हजार हेक्टेयर से उछलकर 1.07 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का रकबा 9 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 11 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा। मूंग की बिजाई 3 हजार हेक्टेयर में हुई है।&nbsp;</p><p>इसी तरह तिलहन फसलों में मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 53 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 61 हजार हेक्टेयर तथा अरंडी का बिजाई क्षेत्र 7 हजार हेक्टेयर से उछलकर 14 हजार हेक्टेयर पर पहुंचा। इसके अलावा वहां 6 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन तथा 3 हजार हेक्टेयर में तिल की खेती हुई है। बिजाई की प्रक्रिया अभी जारी है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35235</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:03:14 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[सीमा शुल्क में वृद्धि से रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात पर लगा अंकुश]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">मुम्बई। क्रूड एवं रिफाइंड खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में अंतर बढ़ने के कारण भारत में खासकर इंडोनेशिया एवं मलेशिया से आरबीडी पामोलीन के आयात पर काफी हद तक अंकुश लग गया है। लेकिन नेपाल से रिफाइंड खाद्य तेलों का भारी आयात जारी है क्योंकि उस पर सीमा शुल्क नहीं लगता है।&nbsp;</span></p><p>उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नवम्बर 2025 से जून 2026 के आठ महीनों में देश के अंदर कुल 3,68,756 टन रिफाइंड खाद्य तेल का आयात हुआ जो 2024-25 सीजन की समान अवधि के आयात 15 लाख टन से बहुत कम रहा। इसमें भी इंडोनेशिया की भागीदारी करीब 25 हजार टन तथा मलेशिया की हिस्सेदारी महज 8 हजार टन की रही जबकि शेष रिफाइंड खाद्य तेल का आयात नेपाल से किया गया। </p><p>अगर नेपाली उत्पाद पर अंकुश लगाने का सकल एवं गंभीर प्रयास किया जाए तो भारत में रिफाइंड खाद्य तेल का आयात लगभग बंद हो सकता है। इन 8 महीनों में नेपाल से करीब 3.39 लाख टन खाद्य तेल मंगाया गया जिसमें केवल 3 हजार टन क्रूड तेल शामिल था जबकि शेष 3.36 लाख टन रिफाइंड खाद्य तेल सम्मिलित था। इस पर अंकुश लगाने की जरूरत है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35233</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 16:19:47 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[राजस्थान में खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से काफी पीछे]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">जयपुर। देश के पश्चिमी भाग में अवस्थित एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक प्रान्त- राजस्थान में इस वर्ष 15 जुलाई तक खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र 107.54 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 129.41 लाख हेक्टेयर से 21.87 लाख हेक्टेयर कम है।&nbsp;</span></p><p>राज्य कृषि विभाग की नवीनतम साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन के दौरान राजस्थान में धान एवं मोटे अनाजों का उत्पादन क्षेत्र 55.89 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 43.05 लाख हेक्टेयर, दलहनों का बिजाई क्षेत्र 30.13 लाख लाख हेक्टेयर से घटकर 25.86 लाख हेक्टेयर, तिलहनों का क्षेत्रफल 19.47 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 19.25 लाख हेक्टेयर तथा कपास का रकबा 6.20 लाख हेक्टेयर से गिरकर 5.26 लाख हेक्टेयर रह गया। इतना ही नहीं बल्कि ग्वार की बिजाई भी 11.26 लाख हेक्टेयर तक ही पहुंच सकी जो गत वर्ष के 15.11 लाख हेक्टेयर से 3.85 लाख हेक्टेयर कम रही।&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;&nbsp;</p><p>समीक्षाधीन सीजन के दौरान राजस्थान में धान का उत्पादन क्षेत्र 2.25 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.81 लाख हेक्टेयर, ज्वार का क्षेत्रफल 5.91 लाख हेक्टेयर से गिरकर 4.56 लाख हेक्टेयर, बाजरा का बिजाई क्षेत्र 38.57 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 28.16 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 9.14 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 8.51 लाख हेक्टेयर रह गया।&nbsp;</p><p>दलहन फसलों में मूंग का उत्पादन क्षेत्र 19.28 लाख हेक्टेयर से घटकर 17.65 लाख हेक्टेयर, मोठ का रकबा 7.47 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 4.62 लाख हेक्टेयर, चौला का बिजाई क्षेत्र 57 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 53 हजार हेक्टेयर तथा तुवर का क्षेत्रफल 10 हजार हेक्टेयर से गिरकर 3 हजार हेक्टेयर रह गया लेकिन उड़द का उत्पादन क्षेत्र 2.72 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 3.03 लाख हेक्टेयर हो गया।&nbsp;</p><p>इसी तरह तिलहन फसलों में तिल का रकबा 1.44 लाख हेक्टेयर से घटकर 78 हजार हेक्टेयर तथा सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र 9.26 लाख हेक्टेयर से गिरकर 8.45 लाख हेक्टेयर पर अटक गया लेकिन मूंगफली का उत्पादन क्षेत्र 8.61 लाख हेक्टेयर से उछलकर 9.85 लाख हेक्टेयर तथा अरंडी का क्षेत्रफल 13 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 17 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35231</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:39:37 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[जून में अमरीकी अखरोट का निर्यात 17 प्रतिशत बढ़ा]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-17-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">लॉस एंजिल्स। कैलिफोर्निया वॉलनट बोर्ड एंड कमीशन की रिपोर्ट से पता चलता है कि जून 2025 की तुलना में जून 2026 के दौरान अमरीका के घरेलू प्रभाग में अखरोट की मांग 39 प्रतिशत घटकर 5,10,474 पौंड पर अटक गई मगर विदेशों में इसका निर्यात 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 91 लाख पौंड पर पहुंच गया। इस तरह अखरोट का कुल कारोबार 96 लाख पौंड के करीब रहा जो गत वर्ष से 12 प्रतिशत ज्यादा था।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> छिलका रहित अखरोट के दाने की घरेलू बिक्री 52 प्रतिशत बढ़कर 204 लाख पौंड तथा निर्यात बिक्री 56 प्रतिशत उछलकर 195 लाख पौंड पर पहुंची जबकि कुल बिक्री 54 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 399 लाख पौंड पर पहुंच गई।&nbsp;</span></p><p>उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चालू मार्केटिंग सीजन में जून 2026 तक अमरीका से कुल 28,75,09,000 पौंड अखरोट का निर्यात हुआ जो पिछले सीजन की समान अवधि के शिपमेंट 13,75,26,000 पौंड से 109 प्रतिशत अधिक रहा। इस अवधि में वहां अखरोट की घरेलू खपत 1,03,80,000 पौंड से 40 प्रतिशत बढ़कर 1,45,31,000 पौंड पर पहुंच गई।&nbsp;</p><p>समीक्षाधीन अवधि के दौरान अमरीका से अखरोट का निर्यात तुर्की को 3,16,37,000 पौंड से 306 प्रतिशत उछलकर 12.85 करोड़ पौंड तथा इटली को 3,32,25,000 पौंड से 14.7 प्रतिशत बढ़कर 8,81,23,000 पौंड पर पहुंच गया लेकिन भारत में निर्यात 3,00,40,000 पौंड से 8 प्रतिशत घटकर 2,76,80,000 पौंड पर अटक गया। स्पेन में भी निर्यात 12 प्रतिशत घट गया जबकि वियतनाम, मोरक्को सहित अन्य देशों में निर्यात बढ़ गया।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35229</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 15:16:03 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[शॉर्ट कवरिंग से चीनी का वैश्विक वायदा भाव मजबूत]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">न्यूयार्क। हालांकि सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- ब्राजील से चीनी की अच्छी आपूर्ति हो रही है मगर अल नीनो के खतरे को देखते हुए कारोबारियों एवं निवेशकों द्वारा लिवाली में अच्छी दिलचस्पी दिखाए जाने से पिछले दिन इसका वैश्विक वायदा भाव कुछ मजबूत हो गया। अल नीनो के प्रभाव से भारत एवं थाईलैंड सहित कुछ अन्य देशों में गन्ना एवं चीनी का अगला उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। उधर यूरोपीय संघ में भीषण गर्मी एवं शुष्क मौसम के प्रकोप से चुकंदर की फसल को क्षति हो सकती है।&nbsp;</span></p><p>न्यूयार्क एक्सचेंज में पिछले कई सप्ताहों से चीनी का भाव नरम चल रहा था लेकिन पिछले दिन इसमें सुधार दर्ज किया गया। अल नीनो के प्रति बढ़ती चिंता से बाजार में तेजी का माहौल बन गया। वैसे अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि चीनी वायदा में आए सुधार का प्रमुख तात्कालिक कारण अल नीनो नहीं बल्कि सटोरियों की लिवाली है। वैश्विक बाजार में चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है और चीनी उत्पादन का पीक सीजन अभी जारी है।&nbsp;</p><p>पिछले दिन की तेजी के बावजूद कच्ची चीनी (रॉ शुगर) का वायदा मूल्य आगे स्थिर या नरम रह सकता है। एक्सचेंज में घबराहटपूर्ण लिवाली नहीं हो रही है बल्कि सामान्य ढंग से कारोबार हो रहा है। </p><p>ब्राजील में 2026-27 सीजन के दौरान भी विशाल मात्रा में चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है जबकि इसकी निर्यात मांग ज्यादा मजबूत नहीं है। अप्रैल 2026 से वहां गन्ना की क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन का नया सीजन आरंभ हुआ है। </p><p>वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही तक वैश्विक बाजार में चीनी का अधिशेष स्टॉक उपलब्ध रह सकता है जबकि अंतिम तिमाही में उत्पादन पर संशय बना रहेगा। रिफाइंड (सफेद) चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति कुछ जटिल रह सकती है।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35224</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 13:46:50 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[रेलवे के माध्यम से खाद्यान्न, आटा एवं दालों के परिवहन का किराया नियत]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। रेलवे बोर्ड ने भारतीय रेलवे के सभी महाप्रबंधकों को पत्र भेजकर सूचित किया है कि खाद्यान्न, आटा एवं दलहन-दाल के परिवहन के लिए किराया भाड़ा का समानीकरण करने का निर्णय लिया गया है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> इसके तहत रेल वैगनों के माध्यम से भेजे जाने वाले उपरोक्त उत्पादों के लिए 1000 कि०मी० तक 1.55 रुपए प्रति टन / कि०मी०, 1000 से 3000 कि०मी० तक 1.15 रुपए प्रति टन / कि०मी० तथा 3000 कि०मी० से अधिक दूरी तक भी 1.15 रुपए / कि०मी०&nbsp; का भाड़ा निश्चित किया गया है। भाड़ा के लिए न्यूनतम दूरी 100 कि०मी० निर्धारित की गई है।&nbsp;</span></p><p>इसी तरह कंटेनरों में खाद्यान्न, आटा एवं दाल-दलहन के परिवहन हेतु हॉलेज चार्ज का समानीकरण भी किया गया है। इसके तहत 200 कि०मी० तक का किराया 0.85 रुपए प्रति जी टी के एम (ग्रॉस टनेज कि०मी०) 200 से 500 कि०मी० तक की दूरी के लिए 0.75 रुपए प्रति जी टी के एम तथा 500 कि०मी० से अधिक दूरी के लिए भी 0.75 रुपए प्रति जी टी के एम का भाड़ा नियत किया गया है। चार्ज के लिए न्यूनतम दूरी 50 कि०मी० निश्चित की गई है।&nbsp;</p><p>अब व्यस्त सीजन का चार्ज एवं विकास शुल्क की वसूली नहीं की जाएगी लेकिन टर्मिनल चार्ज एवं टीएसी मौजूदा नियमों के अनुरूप ही प्रभावित रहेगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए परिवहन भाड़ा में 6 प्रतिशत की रियायत लागू रहेगी। किराया-भाड़ा से सम्बन्धित अन्य नियम प्रावधान भी बरकरार रहेंगे।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35222</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 12:44:33 +0530</pubDate>
            </item>
                    <item>
                <title><![CDATA[बिजाई क्षेत्र में भारी कमी से चावल, दलहन एवं तिलहन का भाव तेज]]></title>
                <link><![CDATA[https://test.igrainindia.com/posts/-]]></link>                
                <description><![CDATA[<p><span style="font-size: 1rem;">नई दिल्ली। मानसून की कम बारिश एवं कई इलाकों में सूखे की स्थिति रहने से इस वर्ष खरीफ फसलों के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट देखी जा रही है। लगभग सभी प्रमुख खरीफ फसलों का रकबा गत वर्ष से काफी पीछे चल रहा है।</span></p><p><span style="font-size: 1rem;"> इसके फलस्वरूप चावल, दाल-दलहन एवं खाद्य तेल-तिलहन आदि के खुदरा मूल्य में तेजी-मजबूती का माहौल बनने लगा है। समझा जाता है कि कई महत्वपूर्ण खाद्य उत्पादों के स्टॉक को रोकने की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है जिससे मार्केट में उसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल हो सकती है। जून में थोक महंगाई दर में भी भारी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।&nbsp;</span></p><p>दलहन फसलों में तुवर, उड़द एवं मूंग तथा तिलहनों में सोयाबीन का बिजाई क्षेत्र काफी घट गया है। धान की खेती भी कम क्षेत्रफल में हुई है। अल नीनो के प्रभाव से मानसून इस बार कमजोर रहने की संभावना है जिससे आगे भी बिजाई पर असर पड़ सकता है। </p><p>जहां तक धान की बात है तो मई में इसकी महंगाई दर 0.23 प्रतिशत रही थी जो जून में बढ़कर&nbsp; 1.72 प्रतिशत हो गई। पिछले साल की तुलना में इस वर्ष 10 जुलाई तक धान के उत्पादन क्षेत्र में 9.63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।&nbsp;</p><p>इसी तरह प्रमुख दलहनों- तुवर, उड़द एवं मूंग की महंगाई दर भी मई के मुकाबले जून में ऊंची रही। हालांकि इस अवधि के दौरान तुवर में महंगाई दर 0.85 प्रतिशत ही रही मगर यह मई के 1.77 प्रतिशत ऋणात्मक स्तर से काफी ऊंची रही। </p><p>इसी तरह उड़द की महंगाई दर 0.89 प्रतिशत से उछलकर 2.16 प्रतिशत तथा मूंग महंगाई दर 1.15 प्रतिशत से बढ़कर 1.71 प्रतिशत पर पहुंच गई। इन दलहनों के बिजाई क्षेत्र में 10 जुलाई 2026 तक क्रमश: 30.29 प्रतिशत, 29.71 प्रतिशत एवं 10.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।&nbsp;</p><p>तिलहनों में महंगाई दर मई के 4.9 प्रतिशत से बढ़कर जून में 5.42 प्रतिशत पर पहुंच गई क्योंकि इसका रकबा भी गत वर्ष से काफी पीछे रहा।</p>]]></description>
                <author><![CDATA[rahul.chauhan@bhartiagri.in (Rahul Chauhan)]]></author>  
				<guid>https://igrain.in/feed/35217</guid>				
                <pubDate>Thu, 16 Jul 2026 12:07:56 +0530</pubDate>
            </item>
                
    </channel>

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