आयातक देशों की मजबूत मांग से भारतीय चावल का भाव ऊंचा

15-Sep-2026 03:42 PM

नई दिल्ली। अमरीका और ईरान के बीच तनाव में कोई कमी आने का संकेत नहीं मिलने से विभिन्न देशों को अपनी खाद्य सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। खाड़ी क्षेत्र के देश चावल की खरीद में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। 

वैश्विक स्तर पर भारतीय चावल की मांग मजबूत होने से कीमतों में तेजी का माहौल देखा जा रहा है। पिछले साल की तुलना में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) के दौरान बासमती चावल के दाम में 15-20 प्रतिशत तथा सामान्य या गैर बासमती चावल के मूल्य में 20-25 प्रतिशत का भारी इजाफा दर्ज किया गया। दक्षिण भारत में वर्षा एवं क्षेत्रफल में कमी के कारण धान के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है। दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में भी अल नीनो के प्रभाव से धान-चावल का उत्पादन घटने की आशंका व्यक्त की जा रही है। 

अक्टूबर-नवम्बर में धान के नए माल की आवक शुरू होने तक चावल का भाव ऊंचा तथा मजबूत रहने की उम्मीद है। वैश्विक बाजार में भी विभिन्न किस्मों एवं श्रेणियों के चावल का भाव हाल के सप्ताहों में तेज हुआ है। एक अग्रणी व्यापार विश्लेषक के अनुसार आयातक देश अपनी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जोरदार प्रयास कर रहे हैं।

इसके तहत खासकर चावल और गेहूं की खरीद आक्रामक ढंग से की जा रही है। पश्चिम-एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देश भारत से विशाल मात्रा में चावल खरीद रहे हैं। बासमती चावल का औसत बाजार भाव अप्रैल-जून  2025 में 85 रुपए प्रति किलो था जो अप्रैल-जून 2026 में बढ़कर 100 रुपए प्रति किलो के आसपास पहुंच गया। बासमती चावल का निर्यात  प्रदर्शन सामान्य रहा। 

गैर बासमती चावल की कीमत भी तेज हुई है। सोना मसूरी चावल का दाम 51-52 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 63-64 रुपए प्रति किलो हो गया है। पुराने चावल का स्टॉक कम बचा है जबकि नए चावल की आपूर्ति शुरू होने में कुछ देर है। निर्यात मोर्चे का परिदृश्य बेहतर बना हुआ है।