साबुत इलायची के निर्यात में शानदार वृद्धि का सिलसिला जारी

17-Jul-2026 05:59 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान साबुत इलायची के निर्यात में मात्रा की दृष्टि से दोगुनी से अधिक तथा आमदनी की दृष्टि से तीन गुनी से ज्यादा की शानदार वृद्धि हुई। साबुत इलायची का निर्यात वित्त वर्ष 2023-24 में 7083 टन रहा था जो 2024-25 में बढ़कर 7674 टन तथा 2025-26 में उछलकर 16,399 टन के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह निर्यात से प्राप्त होने वाली आमदनी वित्त वर्ष 2023-24 के 13.19 करोड़ डॉलर से उछलकर 2025-26 के वित्त वर्ष में 43.68 करोड़ डॉलर पर पहुंची। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान साबुत इलायची के निर्यात से 20.12 करोड़ डॉलर की आमदनी हासिल हुई थी। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इलायची के निर्यात में हो रही जबरदस्त बढ़ोत्तरी से स्पष्ट संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में इसकी भारी मांग रहती है और आयातक देशों में इसे खूब पसंद किया जाता है। भारतीय इलायची प्रीमियम क्वालिटी की होती है इसलिए इसका दाम भी ऊंचा रहता है। बेहतर सुगंध, उच्च क्वालिटी एवं पूरी शुद्धता के कारण खासकर खाड़ी क्षेत्र के देश उसकी खरीद को प्राथमिकता देते हैं। ग्वाटेमाला की इलायची हल्की क्वालिटी की होती है। 

भारतीय इलायची के प्रमुख आयातक देशों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, बांग्ला देश, इराक, कुवैत एवं मलेशिया आदि शामिल हैं। इसके अलावा हॉलैंड (नीदरलैंड), ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, कनाडा, चीन, मिस्र एवं ईरान जैसे देश भी अच्छी मात्रा में इसका आयात करते हैं। 

भारत में दोनों श्रेणी-छोटी (हरी) तथा बड़ी (काली) इलायची का भरपूर उत्पादन होता है। छोटी या हरी इलायची का उत्पादन मुख्यतः पश्चिमी घाट के दक्षिणी भाग (केरल एवं तमिलनाडु) में होता है जबकि बड़ी या काली इलायची का उत्पादन पूर्वोत्तर भारत के उप हिमालय क्षेत्र - सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, आसाम एवं पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में होता है। 

देश में करीब 56-58 प्रतिशत इलायची का उत्पादन अकेले केरल में होता है और वह इसका सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य बना हुआ है। वहां इडुक्की वायनाड तथा पलक्क्ड़ इसके प्रमुख उत्पादक जिले हैं।