महाराष्ट्र में सहकारी चीनी मिलों को मिलेगा आसान ऋण

16-Sep-2026 04:25 PM

मुम्बई। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की सहकारी चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनाने के लिए 750 करोड़ रुपए का आसान एवं सस्ता ऋण मंजूर किया है। राज्य में गन्ना की क्रशिंग अगले कुछ सप्ताहों में आरंभ होने वाली है। राज्य मंत्रिमंडल ने 15 सितम्बर की अपनी बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। 

इस सस्ते ऋण से महाराष्ट्र की सहकारी चीनी मिलों को 2025-26 सीजन के गन्ना मूल्य बकाए का भुगतान करने तथा 2026-27 के सीजन में सुचारु ढंग से अपनी गतिविधियां संचालित करने में सहायता मिलेगी। चीनी मिलों पर गन्ना उत्पादकों का भारी-भरकम बकाया मौजूद है। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र में चीनी मिलों को गन्ना के उचित एवं लाभकरी मूल्य (एफआरपी) का भुगतान करना पड़ता है जिसका निर्धारण केन्द्र द्वारा किया जाता है। इस सॉफ्ट ऋण से बकाया मूल्य का भुगतान सुनिश्चित होने पर गन्ना उत्पादकों को राहत मिलेगी। इसी तरह चीनी मिलों की वित्तीय कठिनाइयां भी दूर होंगी जिसे अगले सीजन में गन्ना क्रशिंग में सुविधा होगी। 

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस स्कीम के अंतर्गत सरकारी चीनी मिलों के लिए ऋण प्राप्त के तरीके को आसान बनाया गया है और इस कर्ज पर लगने वाले ब्याज का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

महाराष्ट्र की चीनी मिलों द्वारा किसानों को गन्ना के 99.5 प्रतिशत एफआरपी का भुगतान किया जा चुका है और इस तरह एफआरपी के क्लीयरेंस के मामले में महाराष्ट्र देश में प्रथम स्थान पर पहुंच गया है। ज्ञात हो कि महाराष्ट्र भारत में चीनी का सबसे प्रमुख तथा गन्ना का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश पहले नम्बर पर रहता है।