मक्का के लिए पशु आहार पॉल्ट्री फीड उद्योग एवं एथनॉल निर्माण के बीच रहेगी प्रतिस्पर्धा
16-Sep-2026 05:30 PM
हैदराबाद। मानसून की कम बारिश के कारण इस वर्ष गन्ना की फसल कुछ कमजोर रहने की संभावना है जबकि सरकार का इरादा चीनी का अधिक से अधिक उत्पादन सुनिश्चित करने का है। इसके फलस्वरूप एथनॉल निर्माण में गन्ना जूस एवं बी-हैवी शीरा के उपयोग को अत्यन्त सीमित किया जा सकता है। यदि ऐसा हुआ तो एथनॉल के उत्पादन में मक्का का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो सकता है। उधर पशु आहार एवं पॉल्ट्री फीड निर्माण उद्योग में मक्का की मांग पहले की भांति मजबूती बनी रहेगी। इस बार खरीफ सीजन में मक्का के बिजाई क्षेत्र में 3 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है और मानसून की पर्याप्त वर्षा भी नहीं हुई है जिससे इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज के उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है।
कम्पाउण्ड लिव स्टॉक फीड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के चेयरमैन का कहना है कि यदि एथनॉल निर्माण में गन्ना अवयवों का इस्तेमाल घटाया अथवा रोका गया तो मक्का का उपयोग तेजी से बढ़ सकता है। इससे पशु आहार एवं पॉल्ट्री फीड उद्योग की कठिनाई बढ़ेगी क्योंकि उसे एथनॉल निर्माताओं की कठिन चुनौती एवं सख्त प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। चेयरमैन ने सरकार से पशु आहार (फीड) उद्योग के लिए मक्का की पर्याप्त आपूर्ति एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा है। फीड निर्माण में मक्का का सर्वाधिक उपयोग होता है।
एसोसिएशन के चेयरमैन ने कहा है कि एथनॉल निर्माण में सरकारी अधिशेष चावल सहित अन्य अनाजों का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन पशु आहार / पॉल्ट्री फीड उद्योग को मक्का का स्टॉक अच्छा मिलना चाहिए क्योंकि उसके बगैर उसका काम ठीक ढंग से नहीं चल सकता है। सरकार को संतुलन की स्थिति बनाने के लिए कदम उठाना होगा। लिव स्टॉक फीड निर्माताओं के पास मक्का के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा।
मक्का की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार के साथ लगातार सम्पर्क किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर मक्का का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 94.10 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 91.60 लाख हेक्टेयर रह गया है। कर्नाटक में भयंकर सूखा पड़ने से मक्का का रकबा गत वर्ष के 17 लाख हेक्टेयर से 21 प्रतिशत घटकर इस बार 13.38 लाख हेक्टेयर पर अटक गया। महाराष्ट्र सहित कुछ अन्य राज्यों में भी मक्का के बिजाई क्षेत्र में गिरावट आई है।
