तिलहन फसलों को भी बारिश की सख्त जरूरत
16-Sep-2026 05:50 PM
नई दिल्ली। खरीफ कालीन तिलहन फसलों की बिजाई लगभग समाप्त हो चुकी है और तिल तथा सूरजमुखी का रकबा बढ़ने के बावजूद इसके कुल उत्पादन क्षेत्र में थोड़ी गिरावट आई है क्योंकि सोयाबीन, मूंगफली तथा अरंडी का क्षेत्रफल पीछे हो गया है।
तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 193.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है जो गत वर्ष के बिजाई क्षेत्र 194.07 लाख हेक्टेयर से सिर्फ 17 हजार हेक्टेयर कम है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 123.06 लाख हेक्टेयर से घटकर 122.08 लाख हेक्टेयर,
अरंडी का रकबा 9.31 लाख हेक्टेयर से गिरकर 8.36 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 50.66 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 50.45 लाख हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर सूरजमुखी का उत्पादन क्षेत्र 67 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 1.29 लाख हेक्टेयर और तिल का क्षेत्रफल 9.64 लाख हेक्टेयर से उछलकर 11.02 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
हालांकि मध्य प्रदेश एवं राजस्थान जैसे प्रांतों में सामान्य बारिश होने से तिलहन फसलों की हालत बेहतर बताई जा रही है लेकिन महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना तथा गुजरात के कुछ भागों में फसलों को भारी वर्षा की जरूरत है। वहां तिलहनों की फसल को खतरा बना हुआ है।
