साप्ताहिक समीक्षा- लालमिर्च

18-Jul-2026 08:48 PM

बारिश की कमी से लालमिर्च बिजाई में विलम्ब : कीमतों में मंदे की संभावना नहीं 

नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में बारिश की कमी के चलते लालमिर्च की बिजाई का कार्य आशानुरूप हो पाया है। हालांकि ट्यूबवैल आधारित क्षेत्रों में बिजाई का कार्य शुरू हो गया है लेकिन वर्षा आधारित खेतों में अभी तक बिजाई का कार्य शुरू नहीं हुआ है हालांकि भाव गत वर्ष से ऊंचे होने के कारण संभावना व्यक्त की जा रही है कि बिजाई क्षेत्रफल में वृद्धि होगी। लेकिन पानी की कमी के चलते लालमिर्च की बिजाई में विलम्ब हो रहा है। उल्लेखनीय है कि गत दिनों हुई वर्षा से कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश में लालमिर्च की बिजाई गत वर्ष की तुलना में अधिक क्षेत्रफल पर किए जाने के समाचार मिल रहे हैं। अगर आगामी सप्ताह तक आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना में बारिश नहीं होती तो लालमिर्च का बिजाई क्षेत्रफल प्रभावित हो सकता है। 
उल्लेखनीय है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य न मिलने के कारण प्रमुख उत्पादक राज्य तेलंगाना, कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश में गत सीजन के दौरान लालमिर्च की बिजाई 30/35 प्रतिशत कम क्षेत्रफल पर की गई थी। जिस कारण से पैदावार में भी कमी आई। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्य आंध्र प्रदेश में इस वर्ष लालमिर्च का उत्पादन सवा करोड़ बोरी का माना गया है जबकि गत वर्ष उत्पादन डेढ़ करोड़ बोरी का रहा था। इसके अलावा तेलंगाना में उत्पादन गत वर्ष में 60/65 लाख बोरी के मुकाबले 45/50 लाख बोरी रहने के अनुमान लगाए गए हैं।  कर्नाटक एवं मध्य प्रदेश में भी उत्पादन गत वर्ष की तुलना में 30/35 प्रतिशत कम रहने के अनुमान लगाए गए थे। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में लालमिर्च की फसल अक्टूबर-नवम्बर माह में आती है जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं कर्नाटक में नए मालों की आवक जनवरी-फरवरी माह में शुरू होती है।  
स्टॉक कम 
उत्पादन में कमी आने के कारण चालू सीजन के दौरान उत्पादक केन्द्रों पर लालमिर्च का स्टॉक गत वर्ष की तुलना में कम रहा। प्राप्त जानकारी के अनुसार आंध्र प्रदेश की गुंटूर मंडी में स्टॉक 40/42 लाख बोरी का माना गया है। जबकि गत वर्ष स्टॉक 50/52 लाख बोरी का रहा था। इसके अलावा खम्मम में स्टॉक गत वर्ष 20/21 लाख बोरी के मुकाबले 14/15 लाख बोरी का रहा। वारंगल में भी स्टॉक 15/16 लाख बोरी होने के समाचार है जबकि गत वर्ष स्टॉक 18/19 लाख बोरी का रहा था।
आवक 
वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर लालमिर्च की आवक काफी कम रह गई है। लेकिन निर्यात व्यापार कम होने के कारण कीमतें नहीं बढ़ रही हैं। मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में गुंटूर मंडी में लालमिर्च की आवक 15/20 हजार बोरी की चल रही है जबकि खम्मम में आवक 8/10 हजार बोरी एवं वारंगल 4/5 हजार बोरी की चल रही है। वर्तमान में गुंटूर मंडी में तेजा क्वालिटी का भाव 190/220 रुपए एवं खम्मम में 190/218 रुपए प्रति किलो बोला जा रहा है। जोकि गत वर्ष की इसी समयावधि की तुलना में 50/60 रुपए प्रति ऊंचे हैं। 
मध्य प्रदेश 
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में लालमिर्च की बिजाई का कार्य अंतिम चरण में है और उत्पादकों को लालमिर्च के भाव गत वर्ष की तुलना में अधिक मिलने के कारण बिजाई क्षेत्रफल गत वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना अधिक हुआ है। अगर आगामी दिनों में फसल को पर्याप्त पानी एवं फसल में कोई रोग नहीं गलता है तो निश्चित की मध्य प्रदेश में लालमिर्च का उत्पादन 55/60 लाख बोरी के आसपास हो जाएगा। चालू सीजन के दौरान उत्पादन 28/30 लाख बोरी का माना गया था। मध्य प्रदेश में नए मालों की आवक सितम्बर-अक्टूबर माह में शुरू होगी। भाव ऊंचे होने के कारण आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं कर्नाटक में भी बिजाई बढ़ने की संभावना है।
मन्द नहीं 
जानकर सूत्रों का कहना है कि लालमिर्च की वर्तमान कीमतों में मंदे की संभावना नहीं है। आगामी दिनों में मांग निकलने के साथ ही कीमतों में तेजी संभव है। क्योंकि मंडियों में स्टॉक कम है इसके अलावा मध्य प्रदेश की फसल भी आने में अभी 4/5 माह का समय शेष है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए संभावना व्यक्त की जा रही है। मध्य प्रदेश की नई आवक शुरू होने से पूर्व मंडियों में लालमिर्च का भाव 240/250 रुपए बन जाना चाहिए।
निर्यात प्रभावित
चीन की आशानुरूप मांग न होने के कारण वर्ष 2025-26 के दौरान लालमिर्च का निर्यात मात्रात्मक रूप में 4 प्रतिशत एवं आय में 9 प्रतिशत घटा है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2025-26 (अप्रैल-मार्च) के दौरान लालमिर्च का निर्यात 683681 टन का हुआ है और निर्यात से प्राप्त आय 10395.59 करोड़ की रही। जबकि वर्ष 2024-25 के  दौरान लालमिर्च का निर्यात 715506 टन का रहा था और निर्यात से प्राप्त आय 11404.9 करोड़ की रही थी।