आगामी रबी सीजन में गेहूं का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
17-Jul-2026 03:49 PM
नई दिल्ली। इस वर्ष तथा कथित सुपर अल नीनो का गंभीर प्रतिकूल असर दक्षिण-पश्चिम मानसून पर देखा जा रहा है जिससे खरीफ फसलों की बिजाई में जोरदार गिरावट आ गई है। अल नीनो का प्रभाव जनवरी-फरवरी 2027 तक बरकरार रहने का अनुमान है जिससे उत्तर-पूर्व मानसून की बारिश भी प्रभावित हो सकती है।
इस बीच अक्टूबर 2026 से खरीफ फसलों की कटाई के साथ रबी फसलों- गेहूं, जौ, चना, मसूर, मटर एवं सरसों आदि की बिजाई आरंभ हो जाएगी जो कमोबेश फरवरी 2027 के तीसरे सप्ताह तक जारी रह सकती है। यदि मौसम एवं मानसून की हालत अनुकूल नहीं रही तो रबी सीजन में गेहूं की बिजाई की गति सुस्त पड़ सकती है। हालांकि गेहूं को धान की भांति जल जमाव की जरूरत नहीं पड़ती है लेकिन इसकी बोआई एवं प्रगति के लिए खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद रहना आवश्यक है।
पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर में आयोजित व्हीट प्रॉडक्ट्स प्रोमोशन सोसायटी (डब्ल्यू पी पी एस) सी ई ओ कॉनक्लेव में विशेषज्ञों ने कहा कि इस वर्ष खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी देर से आरंभ होगी जिससे रबी फसलों की बिजाई में भी विलम्ब हो जाएगा। उसके बाद मौसम और जलवायु की भूमिका पर सबका ध्यान केन्द्रित रहेगा।
एक अग्रणी प्राइवेट मौसम पूर्वानुमान एजेंसी के संचालक का कहना है कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून की हालत खराब है और सितम्बर तक वर्षा की कमी से खरीफ फसलों पर खतरा बना रह सकता है। यह वर्ष एक सूखे का साल साबित हो सकता है जिसका असर खरीफ पर ही नहीं बल्कि रबी फसलों पर भी पड़ने की आशंका है।
वैसे मौसम विभाग ने वर्ष 2016 से ही किसी भी साल को सूखा ग्रस्त वर्ष घोषित करना बंद कर रखा है। वैसे अच्छी बात यह है कि हिन्द महासागर का डायपोल घनात्मक होने वाला है जिससे सितम्बर-अक्टूबर के दौरान देश में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।
